
उत्तर प्रदेश के बरेली में पुलिस ने एक ऐसी कार्रवाई की है, जिसने सोशल मीडिया के ज़रिए फैल रही नफरत और डर की राजनीति पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। हैदरी दल नाम के संगठन के सरगना मजहर की गिरफ्तारी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस सोच की गिरफ्तारी है जो समाज में डर, भ्रम और सांप्रदायिक तनाव फैलाने का काम कर रही थी।
सोशल मीडिया से सड़कों तक फैली नफरत
पुलिस के मुताबिक, झारखंड का रहने वाला मजहर लंबे समय से सोशल मीडिया पर भड़काऊ वीडियो पोस्ट कर रहा था। शुरुआत में उसके वीडियो सामान्य थे, लेकिन धीरे-धीरे उसने पुराने और दूसरे राज्यों के वीडियो उठाकर उन्हें एडिट किया। इन वीडियो को वह बरेली या उत्तर प्रदेश का बताकर वायरल करता और मुसलमानों पर कथित अत्याचार के नाम पर भावनाएं भड़काता था। जांच में सामने आया कि ऐसे अधिकांश वीडियो फर्जी और भ्रामक थे।
समाज सुधार के नाम पर डराने की राजनीति
हैदरी दल खुद को समाज सुधारक बताता था, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट निकली। पुलिस का कहना है कि यह संगठन एक हिंदूवादी संगठन की नकल पर बनाया गया था, जिसका असली मकसद सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना था। खास तौर पर मुस्लिम लड़कियों को निशाना बनाया जाता था ताकि डर और दबाव का माहौल बनाया जा सके।
मोरल पुलिसिंग के नाम पर महिलाओं की बेइज्जती
हैदरी दल के सदस्य सार्वजनिक जगहों पर मुस्लिम युवतियों के साथ अभद्रता करते थे। अगर कोई लड़की किसी हिंदू युवक के साथ दिख जाती, तो उसे खुलेआम अपमानित किया जाता। हिजाब पहनने वाली लड़कियों को धमकियां दी जातीं कि वे धर्म को बदनाम कर रही हैं। कई मामलों में बात मारपीट तक पहुंच गई। पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि 14 फरवरी, वैलेंटाइन डे के दिन गांधी उद्यान में हैदरी दल से जुड़े लोगों ने मुस्लिम लड़कियों के साथ बदसलूकी की थी और उनका हिजाब उतारने की कोशिश भी की गई थी।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बड़ा नेटवर्क
जांच में सामने आया कि हैदरी दल के नाम से यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर कई अकाउंट चलाए जा रहे थे। सर्विलांस के जरिए पुलिस ने इनकी लोकेशन झारखंड के गिरिडीह जिले में ट्रेस की। 24 मार्च को बनाए गए इंस्टाग्राम अकाउंट्स पर कुछ ही समय में करीब 23 हजार फॉलोअर्स जुटा लिए गए थे, जो इस बात का संकेत है कि सोशल मीडिया कितनी तेजी से गलत सूचनाओं का हथियार बन सकता है।
साथियों की गिरफ्तारी और आगे की जांच
पुलिस पहले ही मजहर के दो साथियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें एक होम्योपैथी डॉक्टर और एक कंप्यूटर साइंस इंजीनियर शामिल हैं। मौलाना तौकीर रजा का नाम भी चर्चा में है। आरोप है कि उन्होंने हैदरी दल के समर्थन में बयान दिए थे। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि किन लोगों ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस संगठन का साथ दिया।
पुलिस का साफ संदेश
सीओ सिटी आशुतोष शिवम ने साफ कहा है कि किसी भी तरह से समाज में सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। मजहर के पास से मोबाइल बरामद कर लिया गया है और हैदरी दल से जुड़े सभी सोशल मीडिया अकाउंट्स को बंद किया जा रहा है। यह कार्रवाई बताती है कि कानून अब ऑनलाइन नफरत को भी उतनी ही गंभीरता से ले रहा है जितनी ज़मीनी अपराधों को।
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