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महाकुंभ से ग्लैमर तक: हर्षा रिछारिया की आस्था, संघर्ष और आत्मस्वीकृति की कहानी

महाकुंभ से अचानक चर्चा में आईं हर्षा रिछारिया इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर धार्मिक और ग्लैमर जगत तक बहस
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महाकुंभ से अचानक चर्चा में आईं हर्षा रिछारिया इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर धार्मिक और ग्लैमर जगत तक बहस का बड़ा चेहरा बनी हुई हैं। कभी मॉडल और एंकर के रूप में पहचान बना चुकीं हर्षा, जब साध्वी के रूप में सामने आईं, तो लोगों ने उन्हें आस्था का प्रतीक मान लिया। लेकिन समय के साथ यही पहचान सवालों, आलोचनाओं और विवादों में बदल गई। अब जब उन्होंने एक बार फिर अपने पुराने पेशे में लौटने का फैसला किया है, तो यह कहानी सिर्फ बदलाव की नहीं, बल्कि आत्मसंघर्ष और आत्मस्वीकृति की भी बन गई है।

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    महाकुंभ से मिली पहचान और बढ़ता विवाद

    महाकुंभ के दौरान हर्षा रिछारिया की मौजूदगी देखते ही देखते वायरल हो गई। लाखों लोगों ने उनके साहस और बदलाव को सराहा, लेकिन इसी के साथ आलोचनाओं का दौर भी शुरू हो गया। उनकी निजी जिंदगी, आस्था और फैसलों पर सवाल उठाए जाने लगे। सोशल मीडिया पर समर्थन और विरोध की यह खाई इतनी गहरी हो गई कि उनका साध्वी होना ही बहस का मुद्दा बन गया।

    मौनी अमावस्या के बाद बदला फैसला

    लगातार बढ़ते दबाव, आर्थिक परेशानियों और कर्ज जैसी निजी चुनौतियों ने हर्षा को झकझोर दिया। इन्हीं हालात के बीच उन्होंने मौनी अमावस्या के बाद धर्म के मार्ग से पीछे हटने और अपने पुराने पेशे में लौटने का निर्णय लिया। इस फैसले को लेकर कई तरह की बातें की गईं, लेकिन अब हर्षा ने खुद सामने आकर इसकी वजह बताई है।

    ग्लैमर से मुझे कभी शर्म नहीं रही”

    हर्षा रिछारिया ने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें अपने पुराने पेशे पर कभी पछतावा नहीं रहा। उनके अनुसार, एंकर और एक्टर के रूप में किया गया काम ही उनकी पहली पहचान बना। उसी दुनिया ने उन्हें नाम, सम्मान और आत्मविश्वास दिया। उन्होंने कहा कि ग्लैमर को नकारना अपने अतीत को नकारने जैसा होता, जो वह कभी नहीं कर सकतीं।

    साध्वी बनने का निर्णय और टूटता विश्वास

    हर्षा ने यह भी स्पष्ट किया कि साध्वी बनने का फैसला उन्होंने पूरी समझ और आस्था के साथ लिया था। उनका उद्देश्य धर्म को समझना और समाज तक उसके मूल्यों को पहुंचाना था। इस दौरान कई युवा उनसे जुड़े और उनके विचारों से प्रभावित हुए। लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि धार्मिक समुदाय के भीतर कुछ ऐसे लोग होते हैं, जो अपने ही लोगों को आहत करते हैं। जब ऐसा हुआ, तो उनका विश्वास गहराई तक टूट गया।

    मां नर्मदा के तट पर भावनात्मक पल

    मकर संक्रांति के अवसर पर हर्षा रिछारिया मध्य प्रदेश के जबलपुर पहुंचीं और मां नर्मदा के पवित्र जल में स्नान किया। इस दौरान वह भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा कि जबलपुर और मां नर्मदा से उनका रिश्ता सिर्फ आस्था का नहीं, बल्कि संस्कारों और पहचान का है। यह पल उनके लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं था।

    आज हर्षा रिछारिया अपने जीवन के एक नए मोड़ पर खड़ी हैं। रास्ते बदले हैं, लेकिन आस्था और संस्कार अब भी उनके भीतर जीवित हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि ग्लैमर वर्ल्ड में उनकी वापसी किस रूप में होती है और यह सफर उन्हें किस दिशा में ले जाता है।

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