Last updated: September 17th, 2026 at 10:23 am

रूस और ईरान पर नए अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़े कानून के अमेरिकी संसद से पारित होने के बाद भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि सरकार पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रही है और देश की 140 करोड़ से अधिक आबादी की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना उसकी प्राथमिकता बनी रहेगी।
अमेरिका के नए कानून में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार, 17 सितंबर को इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े फैसले अपने राष्ट्रीय हित और बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर करेगा।
अलग-अलग देशों से तेल और गैस खरीदता रहेगा भारत
विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग देशों से तेल और गैस की खरीद जारी रखेगा। बाजार में होने वाले बदलावों के आधार पर सरकार आगे के फैसले लेगी।
भारत ने यह भी बताया कि इस मुद्दे पर पिछले कुछ महीनों के दौरान अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर बातचीत हुई है। सरकार का कहना है कि वह बदलती परिस्थितियों और संभावित प्रभावों का लगातार आकलन कर रही है।
अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर असर की चेतावनी
भारत ने अमेरिका के सामने यह भी पक्ष रखा है कि नए प्रतिबंधों और टैरिफ का असर केवल भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रह सकता। इससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी प्रभाव पड़ने की संभावना है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा। सरकार भारतीय व्यापार और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर नए घटनाक्रम से होने वाले संभावित प्रभावों से निपटने की तैयारी करेगी।
रूसी तेल पर भारत का क्या रुख?
भारत की ओर से स्पष्ट किया गया है कि रूस से तेल खरीदने सहित ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े फैसले देश के अपने हितों और बाजार की मौजूदा स्थिति के आधार पर लिए जाएंगे।
भारत लंबे समय से रूस से अपेक्षाकृत सस्ता कच्चा तेल खरीदकर अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करता रहा है। इसी वजह से रूसी तेल की खरीद को लेकर अमेरिका की ओर से भारत पर दबाव बढ़ा है।
ट्रंप के पास 100% टैरिफ लगाने का अधिकार
अमेरिकी संसद में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने वाला कानून पारित हो चुका है। दिए गए विवरण के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर के बाद यह कानून लागू होगा।
भारत और चीन समेत कई देश रूस से कच्चा तेल खरीदते हैं। ऐसे में नए अमेरिकी कानून के बाद भारत के सामने ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक हितों और अमेरिका के साथ आर्थिक संबंधों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती बनी हुई है।
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