Last updated: June 29th, 2026 at 05:00 am

हिंद महासागर क्षेत्र में भारत और चीन के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार तेज होती जा रही है। जहां चीन अपने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत विभिन्न देशों के बंदरगाहों और समुद्री ढांचे में निवेश बढ़ा रहा है, वहीं भारत भी अपने भरोसेमंद साझेदार देशों के साथ सुरक्षा और विकास आधारित सहयोग को नई गति दे रहा है।
हाल के वर्षों में चीन ने पाकिस्तान के ग्वादर, श्रीलंका के हम्बनटोटा और अफ्रीका के जिबूती जैसे महत्वपूर्ण समुद्री ठिकानों पर अपनी मौजूदगी मजबूत की है। अब बांग्लादेश के मोंगला पोर्ट में भी उसकी बढ़ती भागीदारी को क्षेत्रीय रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। ऐसे माहौल में भारत ने पश्चिमी हिंद महासागर में स्थित सेशेल्स के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया है।
भौगोलिक रूप से छोटा देश होने के बावजूद सेशेल्स का विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) लगभग 13 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यह क्षेत्र दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों के करीब स्थित है, जहां से प्रतिदिन तेल, गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की बड़ी मात्रा में आवाजाही होती है। भारत के लिए भी इन समुद्री मार्गों का सुरक्षित रहना बेहद महत्वपूर्ण है।
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में सेशेल्स को समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सहयोग दिए हैं। इनमें डोर्नियर समुद्री निगरानी विमान, तेज गश्ती नौकाएं, तटीय रडार नेटवर्क, हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण और रक्षा प्रशिक्षण जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। इन पहलों से सेशेल्स की समुद्री निगरानी क्षमता बढ़ी है और हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक उपस्थिति भी मजबूत हुई है।
भारत की नीति केवल रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच डिजिटल गवर्नेंस, स्वास्थ्य, शिक्षा, जलवायु परिवर्तन, अक्षय ऊर्जा, पर्यटन और ब्लू इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग लगातार बढ़ रहा है। भारत का मानना है कि साझेदारी का आधार विश्वास, स्थानीय जरूरतों और साझा विकास पर होना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा को दोनों देशों के 50 वर्षों के राजनयिक संबंधों को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। इससे पहले वर्ष 2015 में भी उनकी यात्रा के दौरान तटीय निगरानी रडार प्रणाली और समुद्री सुरक्षा सहयोग को नई मजबूती मिली थी।
भारत ने ‘सागर’ (Security and Growth for All in the Region) की अवधारणा को अब ‘महासागर’ (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) के रूप में आगे बढ़ाया है। इस नई सोच में समुद्री सुरक्षा के साथ-साथ आपदा प्रबंधन, डिजिटल कनेक्टिविटी, खाद्य सुरक्षा, सप्लाई चेन और आर्थिक सहयोग को भी बराबर महत्व दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में हिंद महासागर वैश्विक रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र बन सकता है। ऐसे में जहां चीन अपने समुद्री नेटवर्क का विस्तार कर रहा है, वहीं भारत भी सेशेल्स जैसे भरोसेमंद साझेदारों के साथ मिलकर क्षेत्र में संतुलन और स्थिरता बनाए रखने की दिशा में लगातार काम कर रहा है।
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