Last updated: September 22nd, 2026 at 12:39 pm

समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने महिलाओं के साथ होने वाले व्यवहार और कार्यस्थल पर लैंगिक भेदभाव को लेकर अपनी बात रखी है। कैराना सांसद ने महिलाओं से संवाद के दौरान कहा कि एक महिला होने के साथ मुस्लिम और OBC पृष्ठभूमि से आने के कारण उन्हें कई स्तरों पर प्रताड़ना और भेदभाव का सामना करना पड़ता है।
‘महिला होते ही चरित्र और पहनावे पर सवाल’
इकरा हसन ने कहा कि समाज में लंबे समय से पुरुषों का दबदबा रहा है और इस सोच से महिलाओं को लगातार संघर्ष करना पड़ता है। उनके मुताबिक, किसी पुरुष के पहनावे को आमतौर पर उसके काम या सार्वजनिक भूमिका से नहीं जोड़ा जाता, लेकिन जब कोई महिला किसी क्षेत्र में आगे बढ़ती है तो उसके चरित्र और कपड़ों को निशाना बनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को रोजाना ऐसी टिप्पणियों और सवालों का सामना करना पड़ता है। उनकी पहचान, वैवाहिक स्थिति और पहनावे को उनके काम से जोड़ने की कोशिश की जाती है, जबकि इन चीजों का उनके काम से कोई सीधा संबंध नहीं है।
‘मुस्लिम, महिला और OBC हूं, कई लेयर्स की प्रताड़ना’
इकरा हसन ने अपनी स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि वह मुस्लिम हैं, महिला हैं और OBC वर्ग से आती हैं, इसलिए उन्हें कई स्तरों पर प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि यह उनके काम का हिस्सा बन गया है और वह ऐसी परिस्थितियों से निपटना सीख रही हैं।
सांसद ने कहा कि जब कोई व्यक्ति आपको आपके काम के स्तर पर चुनौती नहीं दे पाता, तो वह छोटी-छोटी बातों के जरिए आपको नीचे खींचने की कोशिश कर सकता है। उन्होंने कहा कि वह खुद को ऐसी परिस्थितियों के प्रति मजबूत बनाने की कोशिश कर रही हैं।
‘महिला से आदेश लेना अधिकारियों को नहीं आता’
इकरा हसन ने अपने काम के दौरान सामने आने वाली एक और स्थिति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके साथ काम करने वाले ज्यादातर अधिकारी पुरुष होते हैं और कई बार उन्हें लगता है कि कुछ अधिकारी किसी महिला से निर्देश लेने के अभ्यस्त नहीं हैं।
उनके मुताबिक, कई मौकों पर अधिकारी उनसे सीधे नजर मिलाकर बात करने के बजाय उनके साथ बैठे किसी अधीनस्थ अधिकारी की तरफ देखकर अपनी बात रखते हैं। इकरा ने इसे छोटी घटना बताते हुए कहा कि इसके पीछे बड़े सामाजिक मायने हैं।
महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व पर जोर
इकरा हसन ने कहा कि ऐसी व्यवस्थाएं बनाने की जरूरत है, जिनमें महिलाओं को नेतृत्व करने का अवसर मिले। उनका कहना है कि यह बदलाव परिवार से लेकर सामाजिक कार्यक्रमों और सार्वजनिक जीवन तक हर स्तर पर जरूरी है।
उन्होंने महिलाओं से कहा कि जब तक वे अपने अधिकारों और अपनी जगह के लिए खुद आवाज नहीं उठाएंगी और उन्हें हासिल करने का आत्मविश्वास नहीं जुटाएंगी, तब तक आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर रास्ता बनाना मुश्किल होगा।
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