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ED अधिकारियों की FIR पर हाई कोर्ट सख्त, जवाब नहीं देने पर झारखंड सरकार पर 8 हजार का जुर्माना

झारखंड हाई कोर्ट ने ईडी के तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग से जुड़ी याचिका
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झारखंड हाई कोर्ट ने ईडी के तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार पर 8 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। सोमवार को जस्टिस एके चौधरी की अदालत ने सरकार की ओर से जवाब दाखिल नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई। अदालत ने जुर्माने की रकम झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) में जमा कराने का निर्देश दिया है।

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    इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रतिवादी हेमंत सोरेन पर भी 10 रुपये का हर्जाना लगाया था। अब इस याचिका पर अगली सुनवाई 9 दिसंबर को होगी।

    ईडी के पूर्व अधिकारियों ने दाखिल की है याचिका

    यह याचिका ईडी के तत्कालीन अधिकारियों कपिल राज, देवव्रत झा और अन्य की ओर से दाखिल की गई है। इसमें हेमंत सोरेन की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी को निरस्त करने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान ईडी की तरफ से एएसजी एसबी राजू, वरीय अधिवक्ता एके दास और सौरव कुमार ने अदालत में अपना पक्ष रखा।

    31 जनवरी 2024 को दर्ज हुई थी FIR

    दरअसल, हेमंत सोरेन ने 31 जनवरी 2024 को रांची के एससी-एसटी थाने में ईडी अधिकारियों कपिल राज, देवव्रत झा, अनुपम कुमार, अमन पटेल समेत कुछ अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

    शिकायत में आरोप लगाया गया था कि ईडी अधिकारियों ने उन्हें 29 से 31 जनवरी 2024 तक रांची में रहने के लिए कहा था। इसी दौरान उनकी गैरमौजूदगी में दिल्ली स्थित उनके आवास पर बिना पूर्व सूचना के छापेमारी की गई।

    हेमंत सोरेन ने लगाए थे ये आरोप

    हेमंत सोरेन ने अपनी शिकायत में दावा किया था कि ईडी की इस कार्रवाई से उन्हें मानसिक और सामाजिक रूप से प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। उन्होंने केंद्रीय जांच एजेंसी पर मीडिया के जरिए भ्रामक जानकारियां फैलाने और उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने का आरोप भी लगाया था। वहीं, ईडी के तत्कालीन अधिकारियों ने प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। अधिकारियों ने अदालत से इस FIR को रद्द करने का अनुरोध किया है।

    जवाब के लिए मांगा गया था समय

    याचिका पर पहले हुई सुनवाई में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। सरकार की ओर से जवाब पेश करने के लिए समय मांगा गया, लेकिन सोमवार तक अदालत में जवाब दाखिल नहीं किया गया। इसी देरी पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए झारखंड सरकार पर 8 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। अब मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर को निर्धारित की गई है।

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