Last updated: October 1st, 2026 at 02:22 pm

जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में प्रदर्शनों से निपटने के प्रशासन के तरीके पर सवाल उठाए हैं। संगठन ने आरोप लगाया है कि सरकार की कार्रवाई से क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।
सरकार के कदमों पर उठाए सवाल
JKJAAC की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कैसर खान के नाम से किए गए एक पोस्ट में सवाल उठाया गया कि क्या सरकार की मौजूदा कार्रवाई लोगों को और अधिक उग्र रुख अपनाने की ओर धकेल रही है। पोस्ट में PoJK की स्थिति की तुलना बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों से भी की गई।
संगठन ने दावा किया कि दोनों प्रांतों में सुरक्षा बलों को लगातार हमलों का सामना करना पड़ रहा है और स्थानीय प्रशासन के सामने उग्रवादी गतिविधियों को नियंत्रित करने की चुनौती बनी हुई है। पोस्ट में बलूचिस्तान में महिला आत्मघाती हमलावरों से जुड़ी कुछ रिपोर्टों का भी हवाला दिया गया।
पाकिस्तानी मंत्रियों पर भी निशाना
JKJAAC ने पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी, सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार और गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी की भी आलोचना की। संगठन का आरोप है कि इन नेताओं की ओर से उठाए गए कदम और दिए गए बयान सुरक्षा स्थिति में अपेक्षित सुधार लाने में प्रभावी साबित नहीं हुए हैं।
हालांकि, ये दावे JKJAAC की ओर से लगाए गए आरोप हैं और इनके संबंध में संबंधित पाकिस्तानी अधिकारियों का पक्ष इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों की हिरासत का आरोप
JKJAAC ने PoJK के मुख्य सचिव और पुलिस महानिरीक्षक (IGP) पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने का आरोप लगाया है। संगठन ने नागरिकों और पत्रकारों को हिरासत में लेने, छापेमारी करने और अन्य दबावपूर्ण कार्रवाई किए जाने के भी दावे किए हैं।
पिछले कुछ महीनों में PoJK के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन और झड़पें सामने आई हैं। इन घटनाओं को लेकर JKJAAC और क्षेत्रीय प्रशासन के बीच मतभेद भी सार्वजनिक होते रहे हैं।
शासन और जनता की मांगों को लेकर टकराव
PoJK में जारी विवाद के केंद्र में प्रदर्शन, कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय लोगों की मांगों पर सरकार की प्रतिक्रिया जैसे मुद्दे हैं। JKJAAC और प्रशासन की ओर से घटनाओं के कारणों तथा सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर अलग-अलग दावे किए जाते रहे हैं।
ऐसे में क्षेत्र की स्थिति को लेकर दोनों पक्षों के बयानों में अंतर बना हुआ है और आगे प्रशासन की प्रतिक्रिया तथा JKJAAC की अगली रणनीति पर नजर रहेगी।
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