Last updated: October 13th, 2026 at 08:34 am

झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच के दौरान CID को एक बड़े संगठित गिरोह से जुड़े कई अहम सुराग मिले हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, इस नेटवर्क में छोटे-छोटे समूह बनाकर अभ्यर्थियों से संपर्क किया जाता था और कथित तौर पर पैसे लेकर उन्हें परीक्षा के प्रश्नों के उत्तर रटवाए जाते थे। जांच में आरोपियों के बैंक खातों और मोबाइल लोकेशन से जुड़े तथ्यों का भी मिलान किया गया है। हालांकि, मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
झारखंड से नेपाल तक फैले नेटवर्क की जांच
CID ने अदालत को बताया कि JSSC CGL परीक्षा से जुड़े मामले में झारखंड के बोकारो जिले के दुग्धा के अलावा पटना, कोलकाता, आसनसोल, दुर्गापुर और नेपाल में अभ्यर्थियों को कथित तौर पर परीक्षा के उत्तर याद करवाए गए थे।
जांच में गिरफ्तार आरोपी मुन्ना सिंह की भूमिका भी सामने आई है। CID के मुताबिक, मुन्ना सिंह ने जनवरी 2026 में अभ्यर्थियों से अपने बैंक खाते में पांच लाख रुपये लेने की बात स्वीकार की। शुरुआत में उसने इस रकम को अपने पिता के इलाज के लिए लिया गया पैसा बताया था। लेकिन जांच एजेंसी का दावा है कि उसने परीक्षा से पहले कोलकाता के एक होटल में अभ्यर्थियों को उत्तर रटवाए थे।
बैंक खातों की जांच में लेन-देन के सुराग
CID की जांच में अमित सिंह, कुंदन कुमार और अमित लकड़ा के नाम भी सामने आए हैं। एजेंसी के मुताबिक, इन लोगों की कथित तौर पर गिरोह में भूमिका थी। इनके बैंक खातों की जांच में पैसों के लेन-देन से जुड़े तथ्य मिले हैं।
इसके अलावा, CID ने संदीप कुमार और राजेश प्रसाद यादव को भी गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के अनुसार, इनसे भी अभ्यर्थियों से पैसे लेने-देने के संबंध में जानकारी मिली है। मामले में गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका और उनके बीच कथित संपर्कों की जांच जारी है।
JPSC परीक्षा से जुड़ी याचिकाओं पर हाई कोर्ट में क्या हुआ?
इस बीच झारखंड हाई कोर्ट में JPSC परीक्षाओं को रद्द करने से संबंधित कानूनी विवाद भी जारी है। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने रिट याचिकाओं को अपील याचिका के साथ जोड़ने की मांग स्वीकार नहीं की।
सुनवाई के दौरान अयूब तिर्की की ओर से अधिवक्ता सुभाषिष रसिक सोरेन ने रिट याचिकाओं को अपील के साथ संबद्ध करने का आग्रह किया। वहीं, सफल अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने इसका विरोध किया। उनका तर्क था कि एकल पीठ में मामले की सुनवाई अंतिम चरण में है और याचिकाओं को खंडपीठ में भेजने से संबंधित पक्षों के कानूनी अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
खंडपीठ ने इस विशेष आग्रह को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इससे JPSC परीक्षा से जुड़ी याचिकाओं पर आगे की सुनवाई का रास्ता अलग बना हुआ है।
दो आरोपियों की जमानत याचिका खारिज
JSSC CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में दो आरोपियों मिथिलेश कुमार पांडेय और मनु कुमार सिंह को भी अदालत से राहत नहीं मिली है। अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत ने दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
दोनों ने 5 अक्टूबर को जमानत के लिए आवेदन दिया था। CID ने मिथिलेश कुमार पांडेय को 3 अक्टूबर और मनु कुमार सिंह को 5 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि दोनों ने अपने संपर्कों के जरिए अभ्यर्थियों की परीक्षा में सेटिंग कराने में मदद की और धनबाद तथा बोकारो में परीक्षार्थियों को प्रश्न और उत्तर रटवाने में भूमिका निभाई।
जांच और अदालत की कार्यवाही पर टिकी नजर
JPSC-JSSC परीक्षा विवाद में अब जांच एजेंसी के सामने कथित नेटवर्क की पूरी कड़ी, पैसों के लेन-देन और आरोपियों की भूमिका स्पष्ट करने की चुनौती है। वहीं, जमानत याचिकाओं पर फैसले और हाई कोर्ट में जारी सुनवाई से मामले की कानूनी दिशा तय होगी।
![]()
Comments are off for this post.