Last updated: April 10th, 2026 at 11:05 am

इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को भेज दिया है। यह फैसला उनके खिलाफ चल रहे कैश विवाद और जांच के बाद बढ़ते दबाव के बीच आया है।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद
यह मामला मार्च 2025 का है, जब जस्टिस वर्मा दिल्ली हाई कोर्ट में तैनात थे। 14 मार्च को उनके सरकारी आवास में अचानक आग लग गई थी। आग बुझाने पहुंची टीम को घर के स्टोर रूम से बड़ी मात्रा में जले हुए नोटों की गड्डियां मिली थीं, जिसके बाद यह मामला चर्चा में आ गया।
घटना के समय जस्टिस वर्मा घर पर मौजूद नहीं थे और वे मध्य प्रदेश में थे। इस घटना के बाद उन पर सवाल उठने लगे और मामला गंभीर विवाद में बदल गया।
तबादला और बढ़ता विरोध
विवाद सामने आने के बाद जस्टिस वर्मा का तबादला दिल्ली हाई कोर्ट से वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया। उन्होंने 5 अप्रैल 2025 को यहां दोबारा शपथ भी ली, लेकिन विरोध थमा नहीं।
इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने उनके खिलाफ प्रदर्शन किया, जिसके चलते उन्हें न्यायिक कार्य से अलग कर दिया गया और मामलों की सुनवाई से दूर रखा गया।
सुप्रीम कोर्ट की जांच
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उस समय के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने तीन सदस्यीय आंतरिक जांच समिति गठित की। प्रारंभिक रिपोर्ट में आरोपों को गंभीर बताया गया। रिपोर्ट सामने आने के बाद जस्टिस वर्मा को इस्तीफा देने की सलाह दी गई थी, लेकिन उन्होंने उस समय पद नहीं छोड़ा।
संसद तक पहुंचा मामला
जांच रिपोर्ट राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजी गई, जिसके बाद लोकसभा के 146 सांसदों ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में भी कदम बढ़ाए गए।
इस्तीफे के बाद क्या होगा
अब इस्तीफा देने के बाद जस्टिस वर्मा को पूर्व न्यायाधीश के रूप में मिलने वाली सुविधाएं, जैसे पेंशन, मिल सकती हैं। साथ ही वे भविष्य में वकालत भी कर सकेंगे।
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