Last updated: August 17th, 2026 at 09:45 am

लखीसराय: सावन की तीसरी सोमवारी पर लखीसराय स्थित प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर में हुए दर्दनाक हादसे से पूरे बिहार में शोक की लहर है। भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं के बीच अचानक भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। हादसे में कई श्रद्धालुओं की मौत हुई, जबकि कई अन्य घायल हो गए।
घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को घायलों के इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने और राहत कार्यों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया।
भारी भीड़ के बीच अचानक बिगड़े हालात
सावन की सोमवारी होने के कारण अशोकधाम मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मौजूद थी। बड़ी संख्या में कांवरिया और शिवभक्त जलाभिषेक के लिए मंदिर परिसर की ओर बढ़ रहे थे।
इसी दौरान बैरिकेडिंग के आसपास अचानक स्थिति बिगड़ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भीड़ में अफवाह फैलने के बाद लोग सुरक्षित स्थान की ओर तेजी से बढ़ने लगे। बढ़ते दबाव के बीच कई श्रद्धालु गिर पड़े और देखते ही देखते भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हादसे में सात श्रद्धालुओं की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि एक दर्जन से अधिक लोगों के घायल होने की बात सामने आई है।
मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीमें
हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। राहत एवं बचाव अभियान चलाकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। गंभीर रूप से घायल लोगों को बेहतर उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों में रेफर किए जाने की संभावना भी जताई गई है। मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। प्रशासन की ओर से हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।
मृतकों के परिवारों को 4-4 लाख रुपये की सहायता
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मृतकों के आश्रित परिवारों को 4-4 लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान देने की घोषणा की है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सहायता राशि पीड़ित परिवारों तक जल्द पहुंचाई जाए। मुख्यमंत्री ने घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और राहत कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं रहने देने को कहा है।
भीड़ प्रबंधन पर फिर उठे सवाल
अशोकधाम में सावन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में भीड़ नियंत्रण, बैरिकेडिंग, प्रवेश-निकास व्यवस्था और आपातकालीन इंतजाम बेहद अहम हो जाते हैं। हादसे ने धार्मिक स्थलों पर बड़े आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन की तैयारियों पर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं। प्रशासन अब घटना के कारणों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े पहलुओं की जांच कर रहा है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता घायलों का उपचार, प्रभावित परिवारों को सहायता और इलाके में स्थिति को पूरी तरह सामान्य बनाए रखना है।
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