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कश्मीर यूनिवर्सिटी के डॉ. मंज़ूर अहमद मीर ने रचा इतिहास, लगातार चौथे साल दुनिया के टॉप 2% वैज्ञानिकों में शामिल

जम्मू-कश्मीर के लिए एक और गौरवपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। कश्मीर यूनिवर्सिटी में ब्रेस्ट कैंसर पर शोध कर रहे डॉ.
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जम्मू-कश्मीर के लिए एक और गौरवपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। कश्मीर यूनिवर्सिटी में ब्रेस्ट कैंसर पर शोध कर रहे डॉ. मंज़ूर अहमद मीर को लगातार चौथे वर्ष दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में जगह मिली है। यह सूची अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से जुड़े शोधकर्ताओं के सहयोग से तैयार की जाती है।

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    विश्वविद्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, डॉ. मीर को 2023, 2024, 2025 और 2026 के लिए हेल्थ साइंसेज श्रेणी में शामिल किया गया है। वह कश्मीर यूनिवर्सिटी के बायो-रिसोर्सेज विभाग में कार्यरत हैं और गुजरात यूनिवर्सिटी, अहमदाबाद के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ सस्टेनेबिलिटी में एडजंक्ट प्रोफेसर की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं।

    डॉ. मीर का शोध मुख्य रूप से ब्रेस्ट कैंसर के इलाज की संभावनाओं पर केंद्रित है। इसमें पहले से मौजूद दवाओं के नए उपयोग तलाशना, कैंसर के विकास के पीछे काम करने वाली आणविक प्रक्रियाओं को समझना, कैंसर के दूसरे अंगों तक फैलने और दवाओं के प्रति प्रतिरोध जैसे विषय शामिल हैं। उनके शोध का उद्देश्य कैंसर को बेहतर तरीके से समझना और उपचार के नए संभावित रास्तों की पहचान करना है।

    प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, डॉ. मीर अब तक 100 से अधिक शोधपत्र प्रकाशित कर चुके हैं। उनका एच-इंडेक्स 40 और आई10-इंडेक्स 118 बताया गया है। पिछले पांच वर्षों में उनके शोधपत्रों को 4,900 से अधिक बार उद्धृत किया गया है। इसके अलावा, उन्होंने 22 किताबें और 85 पुस्तक अध्याय लिखे हैं, जिन्हें एल्सेवियर, टेलर एंड फ्रांसिस और स्प्रिंगर नेचर जैसे अंतरराष्ट्रीय प्रकाशकों ने प्रकाशित किया है।

    शोध के साथ-साथ डॉ. मीर ने शिक्षा के क्षेत्र में भी योगदान दिया है। उन्होंने SWAYAM मंच के लिए इम्यूनोलॉजी, एंडोक्रिनोलॉजी, ह्यूमन जेनेटिक्स और ह्यूमन पॉपुलेशन जेनेटिक्स पर चार ऑनलाइन पाठ्यक्रम तैयार किए हैं। विश्वविद्यालय के अनुसार, इन पाठ्यक्रमों से सात वर्षों में 20,000 से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं।

    डॉ. मीर ने लाइफ साइंसेज में गोल्ड मेडल के साथ मास्टर डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली और CSIR-इंस्टीट्यूट ऑफ माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी, चंडीगढ़ से पीएचडी पूरी की। उन्हें कैंसर अनुसंधान के क्षेत्र में कई सम्मान भी मिल चुके हैं। इनमें 2022 का बेस्ट कैंसर रिसर्चर अवॉर्ड, 2019 का टीचर एसोसिएटशिप रिसर्च एक्सीलेंस अवॉर्ड और 2026 में मिला ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस एंड केयर एक्सीलेंस अवॉर्ड शामिल हैं।

    उन्होंने बाहरी वित्तीय सहायता से छह शोध परियोजनाएं पूरी की हैं और फिलहाल अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन से समर्थित दो परियोजनाओं का नेतृत्व कर रहे हैं। वह आठ पीएचडी शोधार्थियों का मार्गदर्शन कर चुके हैं और पांच अन्य शोधार्थी वर्तमान में उनके निर्देशन में काम कर रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने 60 मास्टर्स विद्यार्थियों को शोध कार्य में मार्गदर्शन दिया है।

    डॉ. मीर वर्ष 2019 से 2025 तक बायो-रिसोर्सेज विभाग के प्रमुख और समन्वयक भी रहे। उन्होंने कुपवाड़ा यूनिवर्सिटी कैंपस के पहले नोडल अधिकारी और समन्वयक के रूप में भी काम किया है। वह अमेरिकन एसोसिएशन फॉर कैंसर रिसर्च और अमेरिकन सोसाइटी ऑफ क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी जैसे अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक संगठनों से जुड़े हैं।

    लगातार चौथे साल इस अंतरराष्ट्रीय सूची में जगह मिलना डॉ. मीर के शोध, अकादमिक मार्गदर्शन और ब्रेस्ट कैंसर अध्ययन में उनके योगदान को रेखांकित करता है। उनकी उपलब्धि जम्मू-कश्मीर में वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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