Last updated: January 15th, 2026 at 01:08 pm

उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का हर बयान केवल शब्द नहीं होता, बल्कि एक साफ राजनीतिक संकेत भी होता है। अपने 70वें जन्मदिन के मौके पर मीडिया से बातचीत के दौरान मायावती ने एक बार फिर प्रदेश की जनता, दलित समाज और खास तौर पर ब्राह्मण समाज को संबोधित किया। उनका यह बयान आने वाले समय की राजनीतिक दिशा को समझने के लिए अहम माना जा रहा है।
ब्राह्मण समाज को लेकर मायावती का स्पष्ट संदेश
मायावती ने इस दौरान समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और भाजपा पर सीधा आरोप लगाया कि इन दलों ने हमेशा ब्राह्मण समाज की उपेक्षा की है। उन्होंने कहा कि जब उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकार थी, तब ब्राह्मणों को न केवल सम्मान मिला बल्कि सत्ता और प्रशासन में उनकी उचित भागीदारी भी सुनिश्चित की गई।मायावती ने जोर देकर कहा कि बसपा शासन में ब्राह्मण समाज के साथ न तो अत्याचार हुआ और न ही किसी तरह का अन्याय। उनका कहना था कि ब्राह्मण समाज को अब किसी भी राजनीतिक दल के बहकावे में नहीं आना चाहिए, क्योंकि उन्हें “किसी का बाटी-चोखा” नहीं चाहिए, बल्कि सम्मान और अधिकार चाहिए।
बसपा सरकार का भरोसा
बसपा मुखिया ने यह भी साफ किया कि अगर उत्तर प्रदेश में फिर से बसपा की सरकार बनती है, तो ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। मायावती ने कहा कि उनके शासन में किसी भी वर्ग के खिलाफ जुल्म नहीं होगा और कानून व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यह बयान सीधे तौर पर उस वर्ग को साधने की कोशिश माना जा रहा है, जो खुद को मौजूदा राजनीति में असहज महसूस कर रहा है।
यादव समाज का जिक्र और सपा पर हमला
मायावती ने अपनी बात सिर्फ ब्राह्मण समाज तक सीमित नहीं रखी। उन्होंने यादव समाज का भी जिक्र करते हुए कहा कि बसपा ने हमेशा यादव समाज के हितों की रक्षा की है और आगे भी करती रहेगी। इसके साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। मायावती ने कहा कि सपा का शासन गुंडों और माफियाओं का शासन होता है, जिसमें सबसे ज्यादा नुकसान दलित समाज को उठाना पड़ता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके कार्यकाल में प्रदेश में कोई दंगा नहीं होने दिया गया।
गेस्ट हाउस कांड की याद
अपने बयान में मायावती ने 2 जून 1995 के गेस्ट हाउस कांड का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस दिन सपा से जुड़े हजारों गुंडों ने उन पर जानलेवा हमला किया था। साथ ही आरोप लगाया कि सपा ने महापुरुषों के सम्मान और दलित हितों को लगातार ठेस पहुंचाई है। यह मुद्दा उठाकर मायावती ने एक बार फिर पुरानी राजनीतिक चोटों को जनता के सामने रखा।
जन्मदिन पर राजनीतिक शिष्टाचार
दिलचस्प बात यह रही कि मायावती के 70वें जन्मदिन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। यह दिखाता है कि तीखे राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सार्वजनिक जीवन में औपचारिक सम्मान की परंपरा अब भी बनी हुई है।
![]()
Comments are off for this post.