Last updated: December 17th, 2025 at 02:42 pm

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ में आज हाईकोर्ट की एक बेंच स्थापित करने की माँग को लेकर पूरा शहर बंद रहा। इस बंद का असर आम जनजीवन पर साफ दिखाई दिया। सुबह से ही बाजार, दुकानें, स्कूल और कॉलेज बंद रहे। सड़कों पर आम दिनों की तुलना में काफी कम भीड़ नजर आई। हालांकि प्रशासन की ओर से यह सुनिश्चित किया गया कि जरूरी सेवाएँ पूरी तरह चालू रहें, ताकि आम लोगों को ज्यादा परेशानी न हो।
मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के वकील लंबे समय से हाईकोर्ट की बेंच की माँग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस क्षेत्र के लोगों को न्याय पाने के लिए इलाहाबाद या लखनऊ जाना पड़ता है, जो काफी दूर है। दूरी, समय और खर्च की वजह से गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को बहुत परेशानी होती है। इसी कारण वकील और सामाजिक संगठन चाहते हैं कि मेरठ में हाईकोर्ट की एक शाखा बेंच बनाई जाए, ताकि लोगों को अपने ही क्षेत्र में न्याय मिल सके।
आज के बंद में वकीलों के साथ-साथ व्यापारियों, छात्र संगठनों और आम नागरिकों ने भी समर्थन दिया। मेरठ बार एसोसिएशन और अन्य वकील संगठनों ने पहले ही बंद का आह्वान किया था। इसके चलते बाजार पूरी तरह बंद रहे और शैक्षणिक संस्थानों में भी छुट्टी रही। कई जगहों पर वकीलों और समर्थकों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन भी किया और सरकार से अपनी माँग को जल्द पूरा करने की अपील की।
बंद के दौरान यह ध्यान रखा गया कि किसी भी तरह की हिंसा या जबरदस्ती न हो। पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। शहर के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात किया गया था। एंबुलेंस, अस्पताल, दवा की दुकानें, दूध और पानी जैसी जरूरी सेवाएँ सामान्य रूप से चलती रहीं। इससे आम लोगों को राहत मिली और किसी तरह की बड़ी समस्या नहीं हुई।
वकीलों का कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में करोड़ों की आबादी रहती है और यहाँ से बड़ी संख्या में मुकदमे आते हैं। इसके बावजूद अब तक इस क्षेत्र में हाईकोर्ट की बेंच नहीं है, जबकि दूसरे राज्यों और क्षेत्रों में कई बेंच स्थापित की जा चुकी हैं। उनका तर्क है कि मेरठ ऐतिहासिक और भौगोलिक रूप से भी एक उपयुक्त स्थान है और यहाँ बेंच बनने से न्यायिक व्यवस्था मजबूत होगी।
बंद के माध्यम से आयोजकों ने सरकार का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर खींचने की कोशिश की है। उनका कहना है कि अगर माँग पूरी नहीं होती है तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जा सकता है। वहीं आम लोगों को भी उम्मीद है कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से लेगी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को न्याय के लिए दूर-दराज न भटकना पड़े, इसके लिए जल्द कोई ठोस फैसला लिया जाएगा।
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