Human Live Media

HomeNewsईरान-अमेरिका वार्ता पर महबूबा मुफ्ती का बड़ा बयान: “इसे विफलता कहना गलत, ये लंबी और जटिल प्रक्रिया”

ईरान-अमेरिका वार्ता पर महबूबा मुफ्ती का बड़ा बयान: “इसे विफलता कहना गलत, ये लंबी और जटिल प्रक्रिया”

पुलवामा: पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए वार्ता दौर को लेकर अहम
Peoples-Democratic-Party-PDP-President-Mehbooba-Mufti

पुलवामा: पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए वार्ता दौर को लेकर अहम प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस बातचीत को केवल इस आधार पर विफल नहीं कहा जा सकता कि इसमें कोई बड़ा समझौता सामने नहीं आया। उनके मुताबिक, यह एक लंबी और जटिल कूटनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसमें समय लगना स्वाभाविक है।

Table of Contents

    बातचीत को विफल मानना जल्दबाज़ी

    मुफ्ती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय वार्ता को एक-दो बैठकों के आधार पर विफल करार देना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसी बातचीत कई चरणों में होती है और हर दौर में कुछ न कुछ प्रगति होती है, भले ही वह तुरंत दिखाई न दे। इसलिए लोगों को धैर्य रखना चाहिए और जल्दबाज़ी में निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।

    कई वर्षों से चला आ रहा है विवाद

    उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कोई नया मुद्दा नहीं है। यह विवाद कई सालों से जारी है और इसके पीछे कई ऐतिहासिक, राजनीतिक और रणनीतिक कारण हैं। ऐसे में यह उम्मीद करना कि एक या दो बैठकों में इसका समाधान निकल आएगा, व्यावहारिक नहीं है।

    जटिल और बेहद संवेदनशील मुद्दे शामिल

    मुफ्ती के अनुसार, इस वार्ता में परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं। इन विषयों पर निर्णय लेना आसान नहीं होता, क्योंकि इनका असर केवल दो देशों पर ही नहीं बल्कि पूरे वैश्विक परिदृश्य पर पड़ता है। यही वजह है कि इस तरह की बातचीत में समय लगना स्वाभाविक है।

    दोनों देशों का कड़ा और स्पष्ट रुख

    उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत के दौरान अमेरिका और ईरान दोनों अपने-अपने रुख पर मजबूती से कायम रहे। खासकर ईरान ने अमेरिका की सभी शर्तों को स्वीकार नहीं किया, जिससे किसी ठोस समझौते तक पहुंचना संभव नहीं हो पाया। यह दर्शाता है कि दोनों पक्ष अपने हितों से समझौता करने के लिए अभी तैयार नहीं हैं।

    अंतरराष्ट्रीय और बाहरी कारकों का प्रभाव

    मुफ्ती ने यह भी इशारा किया कि इस तरह की कूटनीतिक वार्ताओं पर कई बाहरी कारकों का भी असर पड़ता है। वैश्विक राजनीति, अन्य देशों के हित और क्षेत्रीय परिस्थितियां बातचीत की दिशा और गति को प्रभावित करती हैं। हालांकि उन्होंने इन कारकों का विस्तार से जिक्र नहीं किया, लेकिन यह साफ किया कि ये प्रक्रिया को और जटिल बना देते हैं।

    बातचीत जारी रहना ही एक सकारात्मक संकेत

    उन्होंने कहा कि भले ही इस दौर में कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ हो, लेकिन बातचीत का जारी रहना अपने आप में एक सकारात्मक संकेत है। यह दिखाता है कि दोनों देश अभी भी संवाद के जरिए समाधान निकालने के लिए तैयार हैं, जो कि कूटनीति में सबसे महत्वपूर्ण बात होती है।

    तुरंत नतीजों की उम्मीद अवास्तविक

    मुफ्ती ने लोगों को यह भी समझाया कि ऐसे संवेदनशील मामलों में तुरंत परिणाम की उम्मीद करना अवास्तविक है। उन्होंने कहा कि अगर कोई यह सोचता है कि इतनी बड़ी समस्याओं का समाधान एक ही रात में हो जाएगा, तो यह पूरी तरह गलत सोच है।

    भविष्य को लेकर जताई उम्मीद

    अंत में महबूबा मुफ्ती ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में लगातार बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों से कोई न कोई सकारात्मक समाधान जरूर निकलेगा। उन्होंने कहा कि संवाद ही किसी भी समस्या का सबसे प्रभावी रास्ता होता है।

    Loading

    Comments are off for this post.