Last updated: December 29th, 2025 at 04:17 pm

साइबर क्राइम के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर कड़ी कार्रवाई, UPI/QR फ्रॉड और पहचान चोरी पर अभियान तेज!
भारत में साइबर क्राइम तेजी से बढ़ रहा है। लोगों के डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन गतिविधियों के बढ़ने के साथ ही अपराधी भी नए‑नए तरीके अपनाकर ठगी, फर्जी निवेश, पहचान चोरी और रैनसमवेयर जैसे अपराध करने लगे हैं। इस चुनौती का सामना करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पुलिस और साइबर सुरक्षा एजेंसियां संयुक्त कार्रवाई कर रही हैं।
Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) की मदद से कई राज्यों में पुलिस ने बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य साइबर अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ना और आम जनता को सुरक्षित बनाना है। इस अभियान में प्रमुख फोकस ऑनलाइन ठगी, UPI/QR कोड फ्रॉड, रैनसमवेयर अटैक और पहचान चोरी जैसी घटनाओं पर है।
जांच में पता चला कि कई अपराधी UPI और QR कोड का गलत इस्तेमाल कर लोगों के बैंक खाते से पैसा निकाल रहे थे। वे फर्जी ऐप और लिंक के माध्यम से लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। इसके अलावा रैनसमवेयर हमले में अपराधी पीड़ितों के कंप्यूटर और मोबाइल को लॉक कर देते हैं और फिर इसे खोलने के लिए भारी रकम की मांग करते हैं। पहचान चोरी के मामलों में अपराधी लोगों की व्यक्तिगत जानकारी चोरी कर फर्जी लेनदेन और फर्जी कागजात बनाते हैं।
I4C ने राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर कई ऑनलाइन निगरानी और डेटा एनालिटिक्स तकनीकें लागू की हैं। इसके जरिए संदिग्ध गतिविधियों की पहचान होती है और समय रहते अपराधियों पर कार्रवाई की जाती है। अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान से न केवल बड़े साइबर अपराधियों को पकड़ा जा रहा है बल्कि उनका नेटवर्क भी तोड़ा जा रहा है।
इस अभियान के तहत पुलिस ने अब तक कई फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म, धोखाधड़ी करने वाले ऐप और ऑनलाइन समूह को सीज किया है। साथ ही, अपराधियों के बैंक खातों को फ्रीज किया गया है और डिजिटल सबूत जब्त किए गए हैं। इससे भविष्य में इस तरह के फ्रॉड की संभावना कम होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि आम लोगों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति सतर्क रहना जरूरी है। किसी भी ऑनलाइन ऐप या लिंक पर भरोसा करने से पहले उसकी पूरी जांच करें। UPI और QR कोड के माध्यम से भुगतान करते समय हमेशा स्रोत की पुष्टि करें। पहचान चोरी और डिजिटल ठगी से बचने के लिए अपने पासवर्ड सुरक्षित रखें और किसी को साझा न करें।
इस राष्ट्रीय अभियान से यह स्पष्ट संदेश गया है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ सरकार और पुलिस पूरी तरह सजग हैं। तकनीकी और डेटा आधारित कार्रवाई से अपराधियों का नेटवर्क कमजोर हो रहा है और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है।
साइबर क्राइम के बढ़ते खतरे को देखते हुए यह भी महत्वपूर्ण है कि राज्य और केंद्रीय एजेंसियां लगातार सामूहिक निगरानी और संयुक्त कार्रवाई करती रहें। इससे डिजिटल दुनिया को सुरक्षित बनाना और अपराधियों को पकड़ना आसान होगा। इस पहल से यह संदेश जाता है कि भारत में साइबर अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
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