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नवविवाहिता की मौत: लापरवाही या साजिश? जांच में जुटा प्रशासन

वाराणसी/रोहतास। रोहतास जिले के राजपुर थाना क्षेत्र के वरना गांव निवासी उर्वशी कुमारी (पिता – महेश दुबे), जिनकी हाल ही
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वाराणसी/रोहतास।

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    रोहतास जिले के राजपुर थाना क्षेत्र के वरना गांव निवासी उर्वशी कुमारी (पिता – महेश दुबे), जिनकी हाल ही में शादी अनूप पांडे से हुई थी, की मौत इलाज के दौरान हो गई। मृतका का इलाज वाराणसी के अखरी बाईपास स्थित पूर्वांचल सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में चल रहा था।

    परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों की गंभीर लापरवाही से उनकी जान गई। उनका कहना है कि महिला को न्यूरो और फेफड़े की समस्या थी, इसके बावजूद बार-बार गुहार लगाने पर भी हॉस्पिटल प्रशासन ने विशेषज्ञ डॉक्टर से नहीं दिखाया। आरोप यह भी है कि महिला पहले से ही बनारस के अन्य अस्पतालों में दिखा चुकी थी, जहां रिपोर्ट में ब्रेन डेड की स्थिति बताई गई थी। बावजूद इसके, उसे भर्ती कर इलाज के नाम पर बड़े पैमाने पर पैसे वसूले गए और परिजनों को मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया गया।

    मृतका के पति ने इस मामले में हॉस्पिटल और डॉक्टरों के खिलाफ पुलिस को लिखित आवेदन दिया है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और कहा है कि रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने भी मामले की निगरानी का आश्वासन दिया है और परिजन प्रशासनिक सहयोग से संतुष्ट दिखे।

    डॉक्टरों का पक्ष

    इस पूरे मामले में जब डॉ. उमेश पटेल से बात की गई तो उन्होंने परिजनों के आरोपों को खारिज किया। उनका कहना है:

    “मरीज की फाइल में कहीं भी ब्रेन डेड नहीं लिखा है। ब्रेन डेड का निर्णय तीन विशेषज्ञों की टीम मिलकर करती है।”

    “जब शाम को वेंटिलेटर हटाया गया तो मरीज हल्की सांस ले रही थी, ऐसे में उसे ब्रेन डेड कैसे कहा जा सकता है?”

    “महिला हमारे आज भर्ती हुई और अगली सुबह उनकी मौत हो गई। ऐसे में हमने कितना पैसा वसूला होगा कि हमें आरोपित किया जा रहा है?”9

    “हमारे यहां डॉ. अरविंद कुमार त्यागी (न्यूरो सर्जन) मौजूद हैं। इसके अलावा मैंने स्वयं क्रिटिकल केयर में तीन साल की ट्रेनिंग ली है।”

    सवाल और जांच

    यह मामला अब पुलिस और प्रशासन के संज्ञान में है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि मौत डॉक्टरों की लापरवाही से हुई या फिर यह केवल एक दुर्भाग्यपूर्ण चिकित्सकीय परिस्थिति थी। परिजन न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं, जबकि डॉक्टर अपनी सफाई दे रहे हैं।

    अब देखने वाली बात होगी कि जांच के बाद सच्चाई क्या सामने आती है — हॉस्पिटल की लापरवाही या फिर केवल साधारण इलाज की असफलता।

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