Last updated: February 26th, 2026 at 05:34 pm

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार ने कई अहम फैसले लिए हैं। पश्चिम बंगाल सरकार की कैबिनेट बैठक में गुरुवार को लिए गए निर्णयों में एसआईआर से जुड़े पीड़ित परिवारों को नौकरी, स्कूलों के विकास के लिए बड़ा बजट और आलू किसानों को राहत शामिल है।
SIR पीड़ित परिवारों को सरकारी नौकरी
राज्य सचिवालय नबान्न में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान मृत लोगों के परिजनों को राहत देने का फैसला किया गया। राज्य सरकार द्वारा तैयार सूची में 61 लोगों के नाम शामिल हैं। कैबिनेट ने तय किया है कि जिन लोगों की कम उम्र में मृत्यु हुई या जो परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे, उनके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी। सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दबाव के कारण कई दुखद घटनाएं सामने आईं।
सरकारी स्कूलों के विकास के लिए 2500 करोड़ रुपये का मेगा प्रोजेक्ट
कैबिनेट ने राज्य के सरकारी स्कूलों को आधुनिक और विश्वस्तरीय बनाने के लिए 2,500 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु ने बताया कि ‘स्कूल क्वालिटी इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट’ के तहत बुनियादी ढांचे और शिक्षण व्यवस्था में व्यापक सुधार किए जाएंगे।
इस परियोजना में एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) कुल लागत का 70 प्रतिशत वित्तीय सहयोग देगा। योजना के तहत राज्य के 430 ब्लॉकों में कम से कम एक मॉडल स्कूल स्थापित किया जाएगा, जबकि पिछड़े ब्लॉकों में दो आधुनिक स्कूल बनाए जाएंगे। लाइब्रेरी, स्वच्छता व्यवस्था और आधुनिक सुविधाओं पर विशेष जोर रहेगा। पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी के लिए विशेष मॉनिटरिंग टीम गठित की जाएगी।
आलू किसानों को राहत, 9.50 रुपये प्रति किलो पर खरीद
कैबिनेट बैठक में आलू किसानों के हित में भी बड़ा निर्णय लिया गया। अधिक उत्पादन के कारण बाजार में कीमतों में गिरावट से परेशान किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सीधे खरीद का फैसला किया है। ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री प्रदीप मजूमदार ने बताया कि मार्च की शुरुआत से सरकार 9.50 रुपये प्रति किलो की दर से आलू खरीदेगी। उनका कहना है कि इससे छोटे और मध्यम किसानों को लाभ मिलेगा और खुदरा बाजार में कीमतें नियंत्रित रहेंगी। राज्य सरकार के इन फैसलों को चुनाव से पहले एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा सुधार और किसानों को आर्थिक राहत प्रदान करना है।
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