Last updated: February 22nd, 2026 at 02:22 pm

नई दिल्ली, 22 फरवरी 2026।
देशभर के ग्रामीण चिकित्सकों के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए आर्श हेल्थ इंडिया फाउंडेशन, चिकित्सक मंच के प्रतिनिधिमंडल ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर करने की प्रक्रिया पूर्ण की।
फाउंडेशन के अनुसार, यह याचिका भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 16, 19(1)(g) और 21 के तहत दायर की गई है। इन अनुच्छेदों के माध्यम से समानता का अधिकार, रोजगार में अवसर की समानता, पेशा चुनने की स्वतंत्रता और जीवन व गरिमा के साथ जीने के अधिकार की रक्षा की मांग की गई है।
क्या है याचिका का मुख्य उद्देश्य?
फाउंडेशन का कहना है कि देश के ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत चिकित्सक वर्षों से स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं, लेकिन उन्हें स्पष्ट कानूनी मान्यता, सुरक्षा और नीति-आधारित संरक्षण नहीं मिल पाया है। ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा इन चिकित्सकों पर निर्भर है, ऐसे में इनके अधिकारों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश और सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक है।
बिहार डेवलपमेंट समिट में भी उठाया मुद्दा
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में आयोजित बिहार डेवलपमेंट समिट में भी भाग लिया। इस दौरान कई जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों से मुलाकात कर ग्रामीण चिकित्सकों की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, डेहरी विधायक राजीव रंजन सिंह, खगड़िया सांसद राजेश वर्मा, सारण एमएलसी सच्चिदानंद राय, बैकुंठपुर विधायक मिथिलेश तिवारी और सांसद मीना सिंह से भेंट कर अपनी बात रखी। बताया गया कि सभी जनप्रतिनिधियों ने इस विषय पर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया है तथा शीघ्र ही पटना में बैठक कर इस मुद्दे को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है।
एकजुट होने की अपील
फाउंडेशन ने देशभर के ग्रामीण चिकित्सकों से अपील की है कि वे इस कानूनी पहल में एकजुट होकर साथ दें, ताकि उनके अधिकारों को मान्यता मिल सके और ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को सशक्त बनाया जा सके। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और सरकार की अगली पहल पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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