Last updated: March 20th, 2026 at 10:35 am

पटना। बिहार की राजनीति में एक नया संवैधानिक मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। हाल ही में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए मुख्यमंत्री Nitish Kumar और भाजपा नेता Nitin Nabin अब ‘दोहरी सदस्यता’ के नियम के कारण निर्णय की स्थिति में आ गए हैं। दोनों नेताओं को तय करना होगा कि वे राज्यसभा में बने रहेंगे या अपनी वर्तमान राज्य स्तरीय सदस्यता छोड़ेंगे।
तय समयसीमा के भीतर लेना होगा फैसला
संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को एक साथ संसद और राज्य विधानमंडल का सदस्य बनने की अनुमति नहीं है। ऐसे में चुनाव जीतने के बाद 14 दिनों के भीतर एक पद छोड़ना जरूरी होता है। इसी नियम के तहत 30 मार्च अंतिम तारीख मानी जा रही है। यदि इस समयसीमा तक फैसला नहीं लिया गया, तो राज्यसभा की सदस्यता स्वतः समाप्त हो सकती है।
कानून क्या कहता है?
भारतीय संविधान का Article 101(2) of the Constitution of India स्पष्ट रूप से बताता है कि कोई भी व्यक्ति एक साथ दो विधायी सदनों का सदस्य नहीं रह सकता। इसके अलावा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में भी यही प्रावधान लागू है, जिसका मकसद सत्ता के टकराव को रोकना और लोकतांत्रिक व्यवस्था को संतुलित बनाए रखना है। यदि संबंधित नेता तय समयसीमा के भीतर अपना इस्तीफा नहीं देते हैं, तो राज्यसभा की सीट स्वतः रिक्त मानी जाएगी। इस प्रक्रिया के लिए अलग से किसी आदेश की आवश्यकता नहीं होती। इसी कारण यह मामला केवल तकनीकी नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बन गया है।
मुख्यमंत्री पद पर कोई प्रभाव नहीं
इस पूरी स्थिति का मुख्यमंत्री पद पर कोई असर नहीं पड़ेगा। Nitish Kumar पहले की तरह अपने पद पर बने रह सकते हैं। यह नियम केवल विधायी सदस्यता तक सीमित है और कार्यपालिका की जिम्मेदारियों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
शपथ और उपस्थिति से जुड़े नियम
संविधान के Article 99 of the Constitution of India के अनुसार, किसी भी सदस्य के लिए शपथ लेना अनिवार्य है। बिना शपथ लिए वह सदन की कार्यवाही में भाग नहीं ले सकता। वहीं, अगर कोई सदस्य 60 दिनों तक सदन से अनुपस्थित रहता है, तो उसकी सीट खाली घोषित की जा सकती है।
![]()
Comments are off for this post.