Last updated: February 7th, 2026 at 11:01 am

उत्तराखंड सरकार राज्य में परिवहन व्यवस्था को नया स्वरूप देने की तैयारी कर रही है। सहकारिता के मॉडल पर आधारित एक नई टैक्सी सेवा जल्द शुरू की जाएगी, जिसमें चार पहिया, तीन पहिया और दुपहिया वाहन शामिल होंगे। इस योजना का मकसद टैक्सी चालकों को सशक्त बनाते हुए उन्हें सेवा का असली भागीदार बनाना है।सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि यह पहल केंद्र सरकार की ‘भारत टैक्सी सेवा’ से प्रेरित है, जिसका शुभारंभ हाल ही में नई दिल्ली में केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा किया गया। उसी तर्ज पर उत्तराखंड में भी सहकारिता आधारित टैक्सी नेटवर्क तैयार किया जाएगा।
ड्राइवर नहीं, होंगे सेवा के मालिक
मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित टैक्सी सेवा में चालकों को केवल वाहन चलाने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें वाहन और सेवा दोनों का स्वामी बनाया जाएगा। यह मॉडल बड़ी निजी कंपनियों के कमीशन आधारित सिस्टम से अलग होगा, जहां चालक अपनी मेहनत की पूरी कमाई के हकदार होंगे। इससे उनकी आय, सामाजिक सुरक्षा और आत्मसम्मान को मजबूती मिलेगी।
पर्यटन और रोजगार को मिलेगा सहारा
डॉ. रावत ने कहा कि उत्तराखंड अब सिर्फ देवभूमि नहीं रहा, बल्कि पर्यटन, तीर्थाटन और डेस्टिनेशन वेडिंग के रूप में तेजी से उभर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य के धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन स्थलों को देश-विदेश में पहचान मिल रही है। इससे यात्रियों की संख्या बढ़ी है और आने वाले समय में सहकारी टैक्सी सेवा राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन में अहम भूमिका निभाएगी।
पहाड़ से मैदान तक मिलेगा लाभ
सरकार का लक्ष्य है कि यह टैक्सी सेवा केवल शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों तक भी पहुंचे। चार पहिया टैक्सियों के साथ-साथ ऑटो और दुपहिया वाहनों को योजना में शामिल किया जाएगा, जिससे स्थानीय युवाओं और वाहन चालकों को सीधा फायदा मिल सके। मंत्री ने बताया कि योजना को लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं और जल्द ही इसे जमीन पर उतारने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
![]()
Comments are off for this post.