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बंगाल चुनाव से पहले सीमा पार गतिविधियों पर अलर्ट, खुफिया एजेंसियों ने बढ़ाई निगरानी

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सुरक्षा एजेंसियां भारत-बांग्लादेश सीमा पर संदिग्ध गतिविधियों को लेकर सतर्क हो गई
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पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सुरक्षा एजेंसियां भारत-बांग्लादेश सीमा पर संदिग्ध गतिविधियों को लेकर सतर्क हो गई हैं। खुफिया इनपुट्स के आधार पर आशंका जताई जा रही है कि चुनाव से पहले अवैध घुसपैठ की कोशिशें तेज हो सकती हैं। सूत्रों के अनुसार, बांग्लादेश के सीमावर्ती जिलों—सतखीरा और चुआडांगा—में हालिया राजनीतिक गतिविधियों के बाद सीमा से लगे भारतीय क्षेत्रों, विशेषकर उत्तर 24 परगना और नदिया जिलों, पर विशेष नजर रखी जा रही है। एजेंसियों को आशंका है कि कुछ कट्टरपंथी तत्वों के प्रभाव में सीमापार आवाजाही बढ़ाने की कोशिश हो सकती है।

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    खुफिया एजेंसियों का दावा

    सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई कथित तौर पर कुछ संगठनों के माध्यम से सीमाई इलाकों में अस्थिरता पैदा करने की रणनीति पर काम कर रही है। हालांकि, आधिकारिक स्तर पर इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है। इनपुट्स के मुताबिक, बड़े समूहों के बजाय छोटे-छोटे समूहों में लोगों को सीमा पार कराने की कोशिश की जा सकती है। एजेंसियां इस संभावना की जांच कर रही हैं कि ऐसे प्रयासों का उद्देश्य स्थानीय जनसांख्यिकीय संतुलन को प्रभावित करना हो सकता है।

    रोहिंग्या नेटवर्क पर भी नजर

    खुफिया तंत्र काक्स बाजार क्षेत्र में रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों से जुड़े नेटवर्क की भी निगरानी कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ संगठनों—जैसे रोहिंग्या सॉलिडैरिटी ऑर्गनाइजेशन (RSO) और अराकान रोहिंग्या सैल्वेशन आर्मी (ARSA)—की गतिविधियों की भी समीक्षा की जा रही है, ताकि किसी संभावित घुसपैठ की योजना को समय रहते रोका जा सके।

    सीमा क्षेत्रों में चौकसी बढ़ी

    सीमा सुरक्षा बल और अन्य एजेंसियों ने संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी है। स्थानीय प्रशासन को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। चुनावी माहौल को देखते हुए किसी भी तरह की अवैध गतिविधि को रोकने के लिए बहु-स्तरीय निगरानी तंत्र सक्रिय किया गया है।

    सामाजिक संतुलन पर चिंता

    सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि अवैध घुसपैठ केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है। अतीत में सीमा क्षेत्रों में मादक पदार्थों की तस्करी, जाली नोट और अन्य आपराधिक गतिविधियों से जुड़े मामले सामने आ चुके हैं, जिन पर एजेंसियां पहले से सख्त कार्रवाई कर रही हैं। फिलहाल, केंद्र और राज्य स्तर की सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित साजिश को नाकाम करने के लिए समन्वित कार्रवाई में जुटी हैं। चुनाव से पहले सीमा पर स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रखने का दावा किया जा रहा है।

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