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बिहार में शराबबंदी पर फिर सियासी संग्राम, तेजस्वी के आरोपों के बीच मांझी ने मानी खामियां

बिहार में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद एक बार फिर शराबबंदी कानून को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो
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बिहार में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद एक बार फिर शराबबंदी कानून को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। ताजा घटना में कई लोगों की जान जाने और कई के गंभीर रूप से बीमार होने के बाद विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ने सवाल उठाए हैं।

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    नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस घटना को बेहद चिंताजनक बताते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मोतिहारी में जहरीली शराब पीने से कई लोगों की मौत हुई है, जबकि कई अन्य की हालत गंभीर बनी हुई है।

    ‘शराबबंदी बन गई कमाई का जरिया’

    तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि राज्य में लागू शराबबंदी कानून अपने मूल उद्देश्य से भटक चुका है। उन्होंने कहा कि यह कानून अब कुछ नेताओं, भ्रष्ट अधिकारियों और शराब माफिया के लिए कमाई का माध्यम बन गया है।

    उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य में खुलेआम अवैध शराब का निर्माण और बिक्री हो रही है, यहां तक कि इसकी होम डिलीवरी भी की जा रही है।

    आंकड़ों को लेकर भी उठाए सवाल

    तेजस्वी ने कहा कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार शराबबंदी लागू होने के बाद से अब तक 1300 से अधिक लोगों की मौत जहरीली शराब से हो चुकी है। उनका कहना है कि वास्तविक संख्या इससे भी ज्यादा हो सकती है।

    जीतन राम मांझी ने भी जताई चिंता

    वहीं, एनडीए सहयोगी और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने माना कि शराबबंदी कानून का उद्देश्य सही है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में कमी रही है। मांझी ने कहा कि कानून को सफल बनाने की जिम्मेदारी सभी की है, लेकिन कहीं न कहीं व्यवस्था में खामियां रह गई हैं, जिसके कारण अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं।

    बढ़ सकती है सियासी गर्मी

    इस पूरे विवाद के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर शराबबंदी बड़ा मुद्दा बनती नजर आ रही है। आने वाले समय में इस पर और तीखी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

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