Last updated: April 9th, 2026 at 07:28 am

बिहार के सारण जिले स्थित प्रसिद्ध आमी धाम बुधवार को उस समय विशेष रूप से श्रद्धा और आस्था के रंग में रंग गया, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र और जदयू से जुड़े नेता निशांत कुमार यहां माता अंबिका के दर्शन के लिए पहुंचे। उनके आगमन को लेकर मंदिर परिसर में पहले से ही उत्साह का माहौल था और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उन्हें देखने के लिए जुटे थे।
मंदिर पहुंचने पर ब्राह्मण विद्वानों और स्थानीय श्रद्धालुओं ने पारंपरिक तरीके से उनका भव्य स्वागत किया। शंख ध्वनि और मंत्रोच्चार के बीच उन्हें गर्भगृह तक ले जाया गया, जहां उन्होंने पूरी श्रद्धा के साथ माता अंबिका की विधिवत पूजा-अर्चना की। पूजा के दौरान उन्होंने माता को चुनरी, नारियल और प्रसाद अर्पित किया और प्रदेशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
इस अवसर पर मंदिर के पुजारियों मुनमुन तिवारी, मनोज तिवारी, प्रेम तिवारी, जितेंद्र तिवारी, राजेश तिवारी, सरोज तिवारी और कुमुद तिवारी ने वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार विशेष पूजा-अनुष्ठान संपन्न कराया। पूरे अनुष्ठान के दौरान वातावरण भक्ति और श्रद्धा से ओत-प्रोत रहा।
पूजा-अर्चना के बाद अंबिका महारानी न्यास समिति के प्रतिनिधि रितेश तिवारी, पूर्व प्रमुख जनार्दन सिंह चौहान और पूर्व मुखिया राकेश सिंह उर्फ बबलू सिंह ने निशांत कुमार को माता अंबिका की तस्वीर और चुनरी भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने मंदिर की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता के बारे में भी विस्तार से जानकारी ली और पुजारियों से बातचीत की।
मंदिर के पुजारी राजेश तिवारी ने बताया कि इससे पहले भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कई बार आमी धाम आकर माता अंबिका का आशीर्वाद ले चुके हैं। इस पर निशांत कुमार ने कहा कि उनके पिता ने पिछले दो दशकों में बिहार के विकास के लिए जो कार्य किए हैं, उन्हें राज्य की जनता हमेशा याद रखेगी।
निशांत कुमार ने आगे कहा कि वे माता अंबिका से प्रार्थना करते हैं कि बिहार निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता रहे और हर घर में सुख-समृद्धि बनी रहे। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक स्थलों पर आकर उन्हें मानसिक शांति मिलती है और यही ऊर्जा उन्हें समाज के लिए बेहतर कार्य करने की प्रेरणा देती है।
उनके इस दौरे को लेकर स्थानीय लोगों में भी खासा उत्साह देखा गया। कई लोगों ने इसे बिहार की खुशहाली के लिए एक सकारात्मक संदेश बताया। कुल मिलाकर, आमी धाम में यह आयोजन आस्था, श्रद्धा और सामाजिक जुड़ाव का एक सुंदर उदाहरण बनकर सामने आया।
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