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निषाद वोट बैंक पर फोकस: 2027 से पहले सपा ने खेला बड़ा राजनीतिक दांव

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी
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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में पार्टी ने निषाद समाज को साधने के लिए बड़ा कदम उठाया है। दस्यु और पूर्व सांसद फूलन देवी की बहन रुक्मिणी देवी निषाद को सपा महिला सभा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है।

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    पार्टी का यह निर्णय पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समीकरण को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हाल ही में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 26 महिलाओं को मूर्ति देवी–मालती देवी सम्मान से नवाजा था, जिसमें बहादुरी के लिए “फूलन देवी सम्मान” भी शामिल था।

    रुक्मिणी देवी निषाद जालौन जिले के शेखपुर गुढ़ा का पुरवा गांव की रहने वाली हैं, जबकि उनका ससुराल औरैया के बूढ़ा दाना गांव में है। वह लंबे समय से राजनीति में सक्रिय हैं और उनकी नई जिम्मेदारी को चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

    प्रदेश की राजनीति में निषाद समाज धीरे-धीरे एक प्रभावशाली वोट बैंक के रूप में उभरा है। आजमगढ़, बलिया, गोरखपुर, मीरजापुर, वाराणसी, सुल्तानपुर, फतेहपुर, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर, भदोही और प्रयागराज जैसे जिलों में इस समाज की अच्छी खासी संख्या है, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है।

    पहले इस समाज पर सपा की अच्छी पकड़ मानी जाती थी। मुलायम सिंह यादव ने ही फूलन देवी को मीरजापुर से सांसद बनाया था। हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा को निषाद वोटरों का पूरा समर्थन नहीं मिल सका था। यही वजह है कि पार्टी अब छोटे-बड़े सभी वर्गों को साथ लाने पर जोर दे रही है।

    वहीं, सपा महिला सभा की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रिबू श्रीवास्तव को वाराणसी कैंट विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी बनाया गया है। इसके बाद से उन्हें आगामी चुनाव में टिकट मिलने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं।

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