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उत्तराखंड में साइबर ठगी का कहर, हर घंटे ₹1 लाख से ज्यादा की लूट, आठवें वेतन आयोग के नाम पर नया जाल

देहरादून। उत्तराखंड में साइबर अपराध तेजी से पैर पसार रहा है। बीते पांच वर्षों में दर्ज करीब 90 हजार शिकायतों
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देहरादून। उत्तराखंड में साइबर अपराध तेजी से पैर पसार रहा है। बीते पांच वर्षों में दर्ज करीब 90 हजार शिकायतों के आधार पर साइबर ठग प्रदेशवासियों से लगभग ₹500 करोड़ की ठगी कर चुके हैं। औसतन देखा जाए तो हर घंटे करीब ₹1.14 लाख, हर दिन लगभग ₹27 लाख और हर साल करीब ₹100 करोड़ की रकम साइबर अपराधियों के हाथों चली जा रही है। चिंताजनक बात यह है कि इतनी बड़ी राशि में से अब तक केवल करीब ₹70 करोड़ ही रिकवर हो पाए हैं।

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    आठवें वेतन आयोग के नाम पर नया फर्जीवाड़ा

    अब साइबर ठगों ने सरकारी कर्मचारियों को निशाना बनाते हुए आठवें वेतन आयोग से जुड़ी जानकारी का लालच देना शुरू कर दिया है। मोबाइल पर एपीके (APK) फाइल भेजकर कहा जाता है कि इसमें वेतन आयोग से संबंधित अपडेट है। जैसे ही फाइल डाउनलोड की जाती है, फोन हैक हो जाता है और बैंक खातों से रकम निकाल ली जाती है। साल 2025 में उत्तराखंड STF की साइबर टीम ने उत्तर प्रदेश, दिल्ली, झारखंड, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल में कार्रवाई कर 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि ये आरोपी डिजिटल अरेस्ट, निवेश स्कैम, शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड, फर्जी कस्टमर केयर और डिस्ट्रीब्यूटरशिप के नाम पर ₹14 लाख से लेकर ₹1.47 करोड़ तक की ठगी कर चुके हैं।

    आरोपी खुद को पुलिस अधिकारी, बैंक कर्मचारी या किसी कंपनी का प्रतिनिधि बताकर लोगों को डराते या लालच देते थे। STF अब इनके अंतरराज्यीय नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।बताया जा रहा है कि निवेश के नाम पर लोगों को 5 हजार लगाकर 15 हजार कमाने या 1 लाख निवेश कर डेढ़ लाख पाने का झांसा दिया जाता है। इसके बाद पीड़ित को टेलीग्राम या व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा जाता है। इन ग्रुप्स में अधिकतर सदस्य खुद ठग होते हैं, जो फर्जी स्क्रीनशॉट दिखाकर मुनाफा होने का दावा करते हैं। इस मनोवैज्ञानिक दबाव में लोग पैसा ट्रांसफर कर देते हैं और कुछ ही मिनटों में रकम अलग-अलग खातों में घुमा दी जाती है।

    डिजिटल अरेस्ट और फर्जी लिंक का बढ़ता खतरा

    ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर ठगी का सबसे खतरनाक तरीका बनकर उभरा है। ठग खुद को पुलिस अधिकारी बताकर कहते हैं कि आपके खिलाफ केस दर्ज है और गिरफ्तारी से बचने के लिए तुरंत पैसे ट्रांसफर करें। डर और घबराहट में लोग लाखों रुपये गंवा बैठते हैं। इसके अलावा RTO चालान के नाम पर फर्जी लिंक, मुद्रा लोन के फर्जी मैसेज, KYC अपडेट के बहाने कॉल, OTP मांगकर ठगी, UPI और QR कोड से अकाउंट खाली करना और सोशल मीडिया अकाउंट हैक कर पैसों की मांग जैसे मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं।

    विदेशी कनेक्शन से रिकवरी मुश्किल

    पुलिस के अनुसार कई मामलों में ठगी का मास्टरमाइंड कंबोडिया और हॉन्गकॉन्ग जैसे देशों में बैठा होता है। पैसा कई खातों से होकर विदेश पहुंच जाता है, जिससे रिकवरी बेहद कठिन हो जाती है। अक्सर पकड़े जाने वाले लोग केवल बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले होते हैं, जबकि असली सरगना तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण रहता है।

    1930 हेल्पलाइन पर तुरंत करें शिकायत

    साइबर ASP कुश मिश्रा ने अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या मैसेज पर भरोसा न करें। यदि साइबर फ्रॉड का शक हो तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं। समय पर सूचना देने से बैंक खाते फ्रीज कर रकम बचाई जा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर ठगी से बचने का सबसे बड़ा हथियार जागरूकता है। जैसे-जैसे अपराधी नए तरीके अपना रहे हैं, वैसे-वैसे आम लोगों को भी डिजिटल सुरक्षा के प्रति सतर्क और जागरूक रहना होगा।

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