Last updated: June 11th, 2026 at 09:13 am

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन कल्चरल सेंटर में नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य फोकस “विकसित भारत @2047” के विजन को आगे बढ़ाते हुए देश में समावेशी मानव विकास को मजबूत करना रहा।
सरकारी जानकारी के अनुसार इस वर्ष की थीम “विकसित भारत 2047 के लिए समावेशी मानव विकास” रखी गई है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के हर नागरिक—चाहे वह किसी भी उम्र, क्षेत्र, लिंग या सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से हो, को समान अवसर और विकास का लाभ मिले।
बैठक में इस व्यापक विजन को जमीनी स्तर पर लागू करने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर ठोस और मापनीय परिणाम हासिल करने पर विशेष जोर दिया गया।
नीति आयोग द्वारा प्रस्तुत रूपरेखा के अनुसार समावेशी मानव विकास के चार प्रमुख स्तंभ तय किए गए हैं
1. मजबूत मानव पूंजी और भविष्य के अनुरूप कौशल विकास
2. उत्पादक रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा
3. स्वास्थ्य, पोषण और समग्र कल्याण
4. समानता और सामाजिक सम्मान आधारित विकास
बैठक में रोजगार सृजन, स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा देने तथा देशभर में सतत और गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर विकसित करने पर भी विचार किया गया।
इसके साथ ही एक मजबूत कार्यान्वयन रोडमैप तैयार करने पर सहमति बनी, जिसमें डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा आधारित नीति निर्माण, बेहतर प्रशासनिक समन्वय और केंद्र-राज्य साझेदारी जैसे तत्व शामिल होंगे। विकास योजनाओं की प्रगति को ट्रैक करने के लिए अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक लक्ष्य तय करने की भी बात कही गई।
नीति आयोग ने इस बात पर भी जोर दिया कि राज्यों की विकास योजनाओं को राष्ट्रीय स्तर के समावेशी मानव विकास विजन के साथ जोड़ा जाए, ताकि देश में संतुलित और टिकाऊ विकास सुनिश्चित हो सके।
बैठक में हाल ही में हुई राष्ट्रीय मुख्य सचिवों की बैठक की सिफारिशों पर भी चर्चा हुई, जिसमें शिक्षा की नींव मजबूत करने, कौशल विकास, भविष्य के लिए तैयार कार्यबल और उच्च शिक्षा सुधार जैसे विषय प्रमुख रहे।
इस बैठक में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल, केंद्रीय मंत्री और नीति आयोग के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए। वहीं तमिलनाडु और कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों ने भी बैठक में भाग लेते हुए अपने-अपने राज्यों की प्राथमिकताओं और विकास संबंधी मुद्दों को सामने रखने की बात कही।
विशेषज्ञों के अनुसार यह बैठक आने वाले वर्षों में भारत के विकास मॉडल को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, खासकर तब जब देश 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।
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