Last updated: August 22nd, 2026 at 12:23 pm

पटना: बिहार में नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीतिक दौर से अलग होने की चर्चाओं के बीच अब उनकी राजनीतिक विरासत और सामाजिक आधार को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। NDA के घटक दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के हालिया बयान ने इस चर्चा को और हवा दे दी है।
कुशवाहा ने संकेत दिया कि नीतीश कुमार के बाद बिहार में उनके राजनीतिक प्रभाव और सामाजिक आधार को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी कौन संभालेगा, यह बड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि राज्य में एक बड़ा वर्ग चाहता है कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा इस भूमिका को निभाए।
‘लव-कुश’ समीकरण पर कुशवाहा का संकेत
उपेंद्र कुशवाहा ने सीधे तौर पर JDU की राजनीतिक विरासत पर दावा नहीं किया, लेकिन उनके बयान में उस सामाजिक समीकरण का स्पष्ट संकेत दिखाई दिया जिसे लंबे समय से नीतीश कुमार की राजनीति का अहम आधार माना जाता है।
इसी वजह से उनके बयान को ‘लव-कुश’ समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषण में ‘लव-कुश’ शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर बिहार के कुर्मी और कोइरी/कुशवाहा सामाजिक समूहों के संदर्भ में किया जाता है।
कुशवाहा का कहना है कि नीतीश कुमार के सक्रिय दौर के बाद उनके समर्थक सामाजिक वर्ग के सामने यह सवाल है कि उनकी राजनीतिक अपेक्षाओं को आगे कौन आवाज देगा। राष्ट्रीय लोक मोर्चा खुद को इस भूमिका के संभावित विकल्प के तौर पर पेश करता नजर आ रहा है।
नीतीश कुमार की भूमिका की तारीफ भी की
विरासत को लेकर चर्चा छेड़ने के साथ ही उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश कुमार के लंबे राजनीतिक कार्यकाल की प्रशंसा भी की। उन्होंने बिहार के विकास में नीतीश कुमार के योगदान को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि राज्य ने पिछले दो दशकों में कई क्षेत्रों में बदलाव देखा है।
कुशवाहा ने केंद्र की NDA सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ नीतीश कुमार के राजनीतिक सहयोग का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, इस सहयोग के दौरान बिहार को विकास की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिली।
उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग वर्षों पहले रोजगार या अन्य कारणों से बिहार से बाहर चले गए थे, उनमें से कई अब वापस लौट रहे हैं और राज्य में आए बदलाव को महसूस कर रहे हैं।
‘हर व्यक्ति के जीवन का एक दौर होता है’
नीतीश कुमार की राजनीतिक भूमिका पर बात करते हुए कुशवाहा ने कहा कि हर व्यक्ति के जीवन में काम करने का एक समय और एक चरण होता है। उनके मुताबिक, नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री के रूप में बिहार की लंबे समय तक सेवा की और अब उनके सक्रिय राजनीतिक दौर को लेकर नई स्थिति बन रही है।
कुशवाहा ने यह भी कहा कि उनके बयान को केवल शब्दों के आधार पर नहीं, बल्कि उसके पीछे की भावना के आधार पर देखा जाना चाहिए।
निशांत कुमार की चर्चा के बीच बयान अहम
नीतीश कुमार के बाद JDU और उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी को लेकर भी बिहार में चर्चा चल रही है। उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीतिक सक्रियता को लेकर भी समय-समय पर अटकलें सामने आती रही हैं।
ऐसे माहौल में NDA के सहयोगी दल के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा का ‘विरासत’ और सामाजिक आधार को लेकर बयान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, उन्होंने JDU के नेतृत्व या संगठन पर सीधे तौर पर कोई दावा नहीं किया है।
अब बिहार की राजनीति में बड़ा सवाल यह है कि नीतीश कुमार के लंबे राजनीतिक दौर से जुड़ा सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव भविष्य में किस दिशा में जाता है। उपेंद्र कुशवाहा ने इस बहस में राष्ट्रीय लोक मोर्चा की भूमिका का संकेत जरूर दे दिया है, लेकिन इसका वास्तविक असर आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम और जनता के समर्थन से ही तय होगा।
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