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पटना के गर्ल्स हॉस्टलों की सुरक्षा पर सख्त हुआ महिला आयोग: बिहार राज्य महिला आयोग ने पटना में स्थित गर्ल्स
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पटना के गर्ल्स हॉस्टलों की सुरक्षा पर सख्त हुआ महिला आयोग:

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    बिहार राज्य महिला आयोग ने पटना में स्थित गर्ल्स हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर हॉस्टलों के सुरक्षा इंतज़ामों का पूरा और विस्तृत ब्यौरा मांगा है। आयोग का कहना है कि लड़कियों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    आयोग को हाल के दिनों में कुछ शिकायतें मिली थीं कि कई हॉस्टलों में सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम नहीं हैं। कहीं सीसीटीवी कैमरे ठीक से काम नहीं कर रहे, तो कहीं गार्ड की संख्या कम है। कुछ जगहों पर रात में गेट बंद करने की व्यवस्था सही नहीं है, जिससे बाहर के लोग भी आसानी से अंदर आ-जा सकते हैं। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए महिला आयोग ने यह कदम उठाया है।

    पत्र में आयोग ने साफ तौर पर कहा है कि हर हॉस्टल में चौबीसों घंटे सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके साथ ही, सभी मुख्य गेट और कॉमन एरिया में सीसीटीवी कैमरे ठीक से काम करने चाहिए। कैमरों की रिकॉर्डिंग भी सुरक्षित तरीके से रखी जानी चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर जांच में मदद मिल सके। आयोग ने यह भी कहा है कि हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं की एंट्री-एग्जिट का पूरा रिकॉर्ड रखा जाए।

    महिला आयोग का मानना है कि पढ़ने या काम करने के लिए दूसरे शहर से आने वाली लड़कियां अपने परिवार से दूर रहती हैं। ऐसे में हॉस्टल ही उनका दूसरा घर होता है। अगर वहां सुरक्षित माहौल नहीं होगा, तो वे मानसिक रूप से भी परेशान रहेंगी और उनका ध्यान पढ़ाई या काम से हट सकता है। इसलिए जरूरी है कि हॉस्टल प्रशासन जिम्मेदारी से काम करे।

    आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि हॉस्टलों में रहने वाली छात्राओं के लिए शिकायत दर्ज कराने की आसान व्यवस्था होनी चाहिए। अगर किसी लड़की को कोई परेशानी या डर महसूस होता है, तो वह तुरंत प्रबंधन या पुलिस को सूचना दे सके। इसके लिए हेल्पलाइन नंबर, शिकायत बॉक्स और वॉर्डन की उपलब्धता जरूरी बताई गई है।

    इसके अलावा, महिला आयोग ने कहा है कि समय-समय पर हॉस्टलों का निरीक्षण किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान सुरक्षा, साफ-सफाई, लाइटिंग और इमरजेंसी व्यवस्था की भी जांच होगी। अगर किसी हॉस्टल में कमी पाई गई, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आयोग का कहना है कि नियमों का पालन न करने वाले हॉस्टलों पर जुर्माना या लाइसेंस रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई भी हो सकती है।

    पटना के कई अभिभावकों और छात्राओं ने आयोग के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे लड़कियों को सुरक्षित महसूस होगा और माता-पिता को भी राहत मिलेगी। छात्राओं ने यह उम्मीद जताई है कि अब हॉस्टल में रहने के दौरान उन्हें डर या असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।

    कुल मिलाकर, बिहार राज्य महिला आयोग का यह कदम लड़कियों की सुरक्षा की दिशा में एक मजबूत पहल है। इससे न सिर्फ हॉस्टलों की जिम्मेदारी बढ़ेगी, बल्कि समाज में भी यह संदेश जाएगा कि बेटियों की सुरक्षा को लेकर सरकार और आयोग पूरी तरह गंभीर हैं। अगर सभी निर्देशों का सही तरीके से पालन हुआ, तो पटना के गर्ल्स हॉस्टल सच में सुरक्षित और भरोसेमंद बन सकते हैं।

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