Last updated: October 9th, 2026 at 12:40 pm

पटना हाईकोर्ट ने रोहतास जिले के सासाराम से जुड़े एक आपराधिक मामले में निचली अदालत की कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने कहा कि जब कोई मामला उसके समक्ष विचाराधीन हो, तो निचली अदालत को न्यायिक अनुशासन और प्रक्रियात्मक मर्यादा का पालन करना चाहिए। अदालत ने ट्रायल कोर्ट की ओर से शुरू की गई आगे की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए पूरे मामले की रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेज तलब किए हैं।
जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस सुनील दत्ता मिश्रा की खंडपीठ सासाराम नगर थाना कांड संख्या 183/2022 से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी।
पीड़िता के खिलाफ FIR और तत्कालीन SP पर कार्रवाई का मामला
मामले में निचली अदालत ने फैसला सुनाते हुए पीड़िता के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 193 के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश रोहतास के पुलिस अधीक्षक को दिया था। यह धारा झूठी गवाही से संबंधित है। इसी मामले में तत्कालीन रोहतास एसपी के खिलाफ भी टिप्पणी की गई थी।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि CrPC की धारा 195, जिसे अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 215 में समाहित किया गया है, के तहत ऐसे अपराध में संबंधित अदालत की लिखित शिकायत के आधार पर ही संज्ञान लिया जा सकता है। सरकार ने दलील दी कि इस प्रक्रिया के तहत सीधे FIR दर्ज करने का निर्देश देना उचित नहीं था।
हाईकोर्ट में अपील लंबित रहने के दौरान शुरू हुई दूसरी कार्रवाई
राज्य सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि मुख्य मामले की अपील हाईकोर्ट में लंबित थी और रिकॉर्ड भी तलब किए जा चुके थे। इसके बावजूद आदेश के पालन में देरी का हवाला देते हुए निचली अदालत में समानांतर कार्रवाई शुरू कर दी गई।
आरोप है कि इस दौरान रोहतास के तत्कालीन एसपी के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही की गई, उन्हें दोषी ठहराया गया और जुर्माना भी लगाया गया। हाईकोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को असाधारण बताते हुए न्यायिक अनुशासन के पालन पर जोर दिया। अदालत ने फिलहाल निचली अदालत में शुरू की गई आगे की कार्रवाई को रोकने का निर्देश दिया है।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश से मांगी गई रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने सासाराम के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश से पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसके साथ ही ट्रायल कोर्ट में शुरू किए गए क्रिमिनल मिसलेनियस केस की पूरी फाइल और संबंधित आदेशों की प्रतियां भी प्रस्तुत करने को कहा गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने क्रिमिनल अपील संख्या 1385/2025 और इससे जुड़ी अन्य अपीलों को 25 नवंबर 2026 को शीर्ष पांच मामलों में सूचीबद्ध कर अंतिम सुनवाई के लिए रखने का निर्देश दिया है।
अब अगली सुनवाई में निचली अदालत की कार्रवाई, कानूनी प्रक्रिया और संबंधित आदेशों पर आगे विचार किया जाएगा।
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