Last updated: January 26th, 2026 at 05:32 pm

बिहार में 77वें गणतंत्र दिवस का आयोजन बहुत ही भव्य तरीके से किया गया। राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। जैसे ही उन्होंने तिरंगा लहराया, पूरा मैदान देशभक्ति के नारों से गूंज उठा। हजारों की संख्या में लोग वहां मौजूद थे। सभी ने खड़े होकर राष्ट्रगान गाया और अपने देश पर गर्व महसूस किया।
ध्वजारोहण के बाद राज्यपाल ने परेड का निरीक्षण किया। पुलिस, होमगार्ड, एनसीसी और स्कूली बच्चों ने शानदार मार्च पास्ट किया। उनकी अनुशासन और एकता देखकर सभी लोग तालियां बजाने लगे। बच्चों ने रंग-बिरंगे कपड़ों में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किए, जिनमें देशभक्ति गीत और नृत्य शामिल थे। इससे पूरे माहौल में जोश और उमंग भर गई।
अपने संबोधन में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने सबसे पहले बिहार और देशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह दिन हमें हमारे संविधान और लोकतंत्र की ताकत की याद दिलाता है। भारत एक ऐसा देश है जहां हर नागरिक को बराबरी का अधिकार मिला है। उन्होंने बताया कि संविधान ने हमें बोलने, जीने और आगे बढ़ने की आज़ादी दी है।
राज्यपाल ने युवाओं से खास तौर पर अपील की कि वे शिक्षा, मेहनत और ईमानदारी के रास्ते पर चलें। उन्होंने कहा कि आज का युवा ही कल का भविष्य है। अगर युवा सही दिशा में आगे बढ़ेंगे तो देश और राज्य दोनों तेजी से तरक्की करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में विकास की कई योजनाएं चल रही हैं, जिनका मकसद गरीब, किसान, मजदूर और महिलाओं को मजबूत बनाना है।
अपने भाषण में उन्होंने सामाजिक एकता पर भी जोर दिया। राज्यपाल ने कहा कि हमें जाति, धर्म और भाषा से ऊपर उठकर एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए। जब हम सब मिलकर काम करेंगे तभी देश मजबूत बनेगा। उन्होंने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार, हिंसा और नफरत से दूर रहकर ही हम सच्चे मायनों में आज़ाद भारत का निर्माण कर सकते हैं।
समारोह के अंत में लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला। बच्चे, युवा, बुजुर्ग सभी तिरंगे के साथ तस्वीरें खिंचवाते नजर आए। गांधी मैदान में देशभक्ति का रंग हर तरफ छाया हुआ था। यह दिन सभी को याद दिलाता है कि हमारा संविधान ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है और हमें मिलकर इसे और मजबूत बनाना है।
इस तरह पटना के गांधी मैदान में मनाया गया 77वां गणतंत्र दिवस न सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम था, बल्कि यह हर बिहारवासी के दिल में देश के लिए गर्व और जिम्मेदारी का एहसास भी लेकर आया।
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