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राज्यसभा की चर्चा और बीजेपी दफ्तर में पवन सिंह का जलवा: क्या ‘पावर स्टार’ की राजनीति में एंट्री पक्की?

भोजपुरी सिनेमा के पावर स्टार पवन सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह कोई नया गाना
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भोजपुरी सिनेमा के पावर स्टार पवन सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह कोई नया गाना या फिल्म नहीं, बल्कि राजनीति है। बीजेपी कोटे से राज्यसभा जाने की अटकलों के बीच पवन सिंह की दिल्ली के बीजेपी दफ्तर में मौजूदगी ने सियासी चर्चाओं को और तेज कर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में पवन सिंह बीजेपी मुख्यालय में नेताओं के साथ नजर आ रहे हैं, जिसके बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या पावर स्टार अब संसद की ओर बढ़ रहे हैं।

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    मकर संक्रांति पर बीजेपी दफ्तर में खास मौजूदगी

    मकर संक्रांति के मौके पर दिल्ली स्थित बीजेपी कार्यालय में पारंपरिक दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया गया था। इसी कार्यक्रम में पवन सिंह को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया। नेताओं के साथ बैठकर दही-चूड़ा खाने के बाद पवन सिंह ने मंच भी संभाला और पूरे माहौल को अपनी मौजूदगी से जीवंत कर दिया। मंच से उन्होंने कहा, “इस मंच पर आने का मौका मिलना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।” यह एक साधारण सा वाक्य था, लेकिन इसके मायने राजनीति में काफी गहरे माने जा रहे हैं।

    गाने से बनाया माहौल, गूंजे नारे

    कार्यक्रम के दौरान पवन सिंह ने अपना चर्चित गीत ‘जोड़ी मोदी और नीतीश के हिट हो जाई’ गाकर वहां मौजूद कार्यकर्ताओं और नेताओं में जोश भर दिया। गाने के साथ पूरा बीजेपी दफ्तर ‘जय श्री राम’ के नारों से गूंज उठा। यह दृश्य सिर्फ एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं था, बल्कि पवन सिंह की राजनीतिक स्वीकार्यता का भी संकेत माना जा रहा है। उनकी मंच पर सहजता और आत्मविश्वास ने यह साफ कर दिया कि वह अब राजनीति के मंच पर भी उतने ही सहज हैं, जितने फिल्मी मंच पर।

    बीजेपी के स्टार प्रचारक के रूप में अहम भूमिका

    बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पवन सिंह ने बीजेपी में वापसी की थी। इसके बाद उन्होंने बतौर स्टार प्रचारक एनडीए के लिए जमकर प्रचार किया। बिहार के गांव-गांव और शहर-शहर में उनकी रैलियां और गाने लोगों को जोड़ते नजर आए। पार्टी के भीतर यह माना जाता है कि उनकी लोकप्रियता ने युवाओं और भोजपुरी बेल्ट के मतदाताओं को एनडीए के पक्ष में मोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई।

    क्या राज्यसभा जाने की तैयारी है?

    हालांकि पवन सिंह विधानसभा चुनाव नहीं लड़ पाए, लेकिन बीजेपी के शीर्ष नेताओं के साथ उनकी बढ़ती नजदीकियां कई संकेत दे रही हैं। दिल्ली में उनकी लगातार मौजूदगी और पार्टी के बड़े आयोजनों में सक्रिय भागीदारी से यह अटकलें तेज हो गई हैं कि बीजेपी उन्हें राज्यसभा भेज सकती है।फिलहाल न तो पवन सिंह ने और न ही बीजेपी के किसी वरिष्ठ नेता ने इस पर कोई आधिकारिक बयान दिया है। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि उनका अगला कदम क्या होगा।

    आगे क्या भूमिका होगी?

    राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि अगर राज्यसभा नहीं, तो पार्टी पवन सिंह को संगठन में कोई बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है। उनकी लोकप्रियता और जनसंपर्क क्षमता को देखते हुए बीजेपी उन्हें लंबे समय के लिए राजनीतिक चेहरे के तौर पर तैयार कर सकती है।

    अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि पावर स्टार पवन सिंह की यह सियासी मौजूदगी सिर्फ चर्चाओं तक सीमित रहती है या फिर वह जल्द ही संसद के गलियारों में भी नजर आएंगे।

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