Last updated: February 20th, 2026 at 01:41 pm

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद दिलीप घोष ने दावा किया है कि राज्य की जनता इस बार बदलाव के मूड में है और सत्तारूढ़ दल इसे रोक नहीं पाएगा। कोलकाता में मीडिया से बातचीत करते हुए घोष ने कहा कि राज्य में भाजपा ही तृणमूल कांग्रेस के सामने वास्तविक चुनौती बनकर उभरी है। उनका आरोप है कि इसी वजह से पार्टी कार्यकर्ताओं और संगठन से जुड़े लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गांव-गांव में लोगों की सोच बदल रही है और जनता परिवर्तन चाहती है।
SIR मुद्दे पर TMC को घेरा
घोष ने विशेष पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर भी तृणमूल कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल चुनाव आयोग और न्यायिक प्रक्रियाओं का विरोध इसलिए कर रहा है क्योंकि उसे जनसमर्थन खिसकने का डर है। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाना जनता के विश्वास को कमजोर करता है।
भाजपा विधायक का TMC में जाना, “कोई असर नहीं”
उत्तर बंगाल के कर्सियांग से भाजपा विधायक बिष्णु प्रसाद शर्मा के तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के सवाल पर घोष ने कहा कि इससे पार्टी को कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। उनका कहना था कि 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर जीतने के बावजूद संबंधित विधायक शुरू से ही पार्टी की विचारधारा और कार्यप्रणाली से पूरी तरह सहमत नहीं थे। घोष ने भरोसा जताया कि पार्टी अपने मजबूत और जीतने वाले उम्मीदवारों को मैदान में उतारेगी और संगठन पहले से अधिक सशक्त होकर चुनाव लड़ेगा।
‘फ्रीबीज’ की राजनीति पर टिप्पणी
मुफ्त योजनाओं की राजनीति को लेकर पूछे गए सवाल पर भाजपा नेता ने कहा कि लगभग सभी दल किसी न किसी रूप में ऐसी घोषणाएं करते हैं, लेकिन इससे स्थायी विकास संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि विकास के लिए आवंटित संसाधनों का उपयोग दीर्घकालिक परियोजनाओं में होना चाहिए। घोष ने उदाहरण देते हुए कहा कि केवल मुफ्त योजनाओं के सहारे चुनाव नहीं जीते जा सकते। जिन सरकारों के पास विकास का स्पष्ट एजेंडा नहीं होता, वे अक्सर लोकलुभावन घोषणाओं का सहारा लेती हैं।
“राज्य की स्थिति चिंताजनक”
दिलीप घोष ने राज्य की मौजूदा स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि बुनियादी ढांचे और रोजगार के मोर्चे पर काफी काम बाकी है। उन्होंने दावा किया कि युवाओं को पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं और कई क्षेत्रों में सड़क व आधारभूत सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है। चुनाव नजदीक आते ही बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना है। आने वाले समय में जनता किसे अपना समर्थन देती है, यह चुनाव परिणामों से स्पष्ट होगा।
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