Last updated: July 26th, 2025 at 05:42 pm

Human LiveNews/ नई दिल्ली 26 जुलाई: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मालदीव की स्वतंत्रता की 60वीं वर्षगांठ पर आयोजित भव्य समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। यह पहली बार है जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने मालदीव के स्वतंत्रता दिवस समारोह में शिरकत की है। यह ऐतिहासिक अवसर भारत और मालदीव के बीच मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा केवल एक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि यह दोनों देशों के बीच गहरी मित्रता और रणनीतिक साझेदारी की पुष्टि भी थी। यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब भारत और मालदीव के बीच राजनयिक संबंधों की 60वीं वर्षगांठ भी मनाई जा रही है, जो 2025 में पूर्ण होगी।
मालदीव की राजधानी माले में आयोजित इस समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइजु के साथ मंच साझा किया। दोनों नेताओं ने मिलकर रिपब्लिक स्क्वायर (गणराज्य चौक) पर आयोजित भव्य परेड का निरीक्षण किया, जिसमें मालदीव के राष्ट्रीय रक्षा बल और स्थानीय इकाइयों ने भाग लिया। परेड के दौरान मालदीव की संस्कृति, परंपरा और सुरक्षा बलों की शक्ति का शानदार प्रदर्शन हुआ।
यह पहली बार था जब राष्ट्रपति मोहम्मद मुइजु ने किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष या शासन प्रमुख की मेज़बानी की। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति मालदीव के लिए विशेष सम्मान का विषय बनी। मालदीव की जनता ने भी प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस यात्रा के दौरान अपने संदेश में कहा कि भारत और मालदीव केवल पड़ोसी ही नहीं, बल्कि पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों से जुड़े हैं। उन्होंने कहा, “मालदीव की स्वतंत्रता की 60वीं वर्षगांठ पर शामिल होना मेरे लिए गर्व का विषय है। भारत और मालदीव मिलकर क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए कार्य करते रहेंगे।”
इस समारोह के माध्यम से भारत और मालदीव के बीच आपसी विश्वास, सहयोग और साझेदारी को नई दिशा मिली है। विशेष रूप से सुरक्षा, समुद्री सहयोग, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग की नई संभावनाएं खुली हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा न केवल कूटनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे मालदीव को भारत के साथ अपने संबंधों को पुनर्स्थापित करने में भी मदद मिलेगी। हाल के वर्षों में कुछ राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत और मालदीव ने हमेशा एक-दूसरे के साथ मजबूती से खड़ा रहने की परंपरा निभाई है।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा “पड़ोसी पहले” (Neighbourhood First) नीति का सशक्त उदाहरण है, जिसके तहत भारत अपने आस-पास के देशों के साथ संबंधों को प्राथमिकता देता है। मालदीव भी इस नीति के तहत भारत का एक अहम भागीदार रहा है।
अंततः यह यात्रा भारत-मालदीव संबंधों के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ती है, जो आने वाले वर्षों में और भी मजबूत होती साझेदारी का आधार बनेगा।
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