Last updated: October 16th, 2026 at 06:29 pm

जम्मू-कश्मीर की पारंपरिक कालीन बुनाई कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। श्रीनगर के ईदगाह इलाके के मास्टर कारीगर रफीक अहमद सूफी को हाथ से बुने हुए कालीन की श्रेणी में प्रतिष्ठित ‘नेशनल अवार्ड 2025’ के लिए चुना गया है। केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय की ओर से दिए जाने वाले इस सम्मान पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उन्हें बधाई दी और इसे पूरे जम्मू-कश्मीर के लिए गर्व का विषय बताया।
रफीक अहमद सूफी साल 2025 में इस श्रेणी में जम्मू-कश्मीर से पुरस्कार पाने वाले एकमात्र व्यक्ति हैं। उन्हें यह सम्मान ऐसे कालीन की उत्कृष्ट कारीगरी के लिए मिला है, जिसमें बारीक फूलों के डिजाइन, पारंपरिक वास्तुकला से प्रेरित पैटर्न और सुलेख यानी कैलिग्राफी की कलात्मक झलक शामिल है।
उमर अब्दुल्ला ने कारीगर की मेहनत को सराहा
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि रफीक अहमद सूफी को मिला यह सम्मान उनकी बेहतरीन कारीगरी, कलात्मक कौशल और कश्मीर की सदियों पुरानी कालीन बुनाई परंपरा को जीवित रखने के प्रयासों की पहचान है।
उन्होंने इस उपलब्धि को जम्मू-कश्मीर के लिए गर्व का क्षण बताया। इस सम्मान से पारंपरिक हस्तशिल्प के क्षेत्र में काम करने वाले कारीगरों के हुनर को भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की उम्मीद है।
बारीक बुनाई और पारंपरिक डिजाइन के लिए मशहूर हैं कश्मीरी कालीन
कश्मीर के हाथ से बुने हुए कालीन अपनी महीन बुनाई, आकर्षक डिजाइनों और पारंपरिक ‘तालीम’ तकनीक के लिए दुनिया भर में पहचाने जाते हैं। इस कला में कारीगर लंबे समय तक मेहनत करके धागों के जरिए जटिल पैटर्न और बारीक आकृतियां तैयार करते हैं।
कश्मीरी कालीन कला को साल 2016 में भौगोलिक संकेतक (GI) टैग भी मिला था। यह पहचान क्षेत्र से जुड़ी पारंपरिक कला और उत्पादों की विशिष्टता को रेखांकित करती है।
दिसंबर में होगा पुरस्कार समारोह
रफीक अहमद सूफी और अन्य पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित करने के लिए दिसंबर 2026 में औपचारिक समारोह आयोजित किए जाने की जानकारी दी गई है।
इस उपलब्धि से कश्मीर के पारंपरिक कालीन उद्योग को बढ़ावा मिलने और नई पीढ़ी के कारीगरों को इस कला से जुड़ने की प्रेरणा मिलने की उम्मीद है। साथ ही, यह सम्मान क्षेत्र की समृद्ध हस्तशिल्प विरासत को संरक्षित करने के महत्व को भी सामने लाता है।
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