Last updated: September 9th, 2026 at 10:39 am

कांग्रेस नेता राहुल गांधी की 2022 की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान सेना को लेकर की गई कथित टिप्पणी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई की मांग की गई है। शिकायतकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने मामले की सुनवाई लंबे समय से सूचीबद्ध नहीं होने पर आपत्ति जताई।
CJI ने कहा- प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करें
सुनवाई के दौरान गौरव भाटिया ने रजिस्ट्री द्वारा मामले को लंबे समय से सूचीबद्ध नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मामले को महीनों से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया गया है।
इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अदालत के लिए यह मायने नहीं रखता कि मामला किस व्यक्ति से जुड़ा है। उन्होंने शिकायतकर्ता की ओर से उचित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा और भरोसा दिलाया कि मामले की सुनवाई की जाएगी।
राहुल गांधी के बयान से जुड़ा है मामला
यह विवाद दिसंबर 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी द्वारा भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर दिए गए बयान से संबंधित है। उन्होंने दावा किया था कि चीनी सैनिक भारतीय जवानों की पिटाई कर रहे हैं।
पूर्व बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन अधिकारी उदय शंकर श्रीवास्तव ने इस बयान को भारतीय सेना का अपमान बताते हुए लखनऊ की MP-MLA अदालत में आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायतकर्ता का कहना है कि भारतीय सेना ने 12 दिसंबर 2022 को चीन की सेना की घुसपैठ की कोशिश नाकाम किए जाने की जानकारी दी थी, जबकि राहुल गांधी ने 16 दिसंबर को इससे संबंधित बयान दिया था।
हाई कोर्ट में भी चुनौती दे चुके हैं राहुल
राहुल गांधी ने लखनऊ की अदालत में चल रही कार्यवाही को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ कुछ सीमाएं भी जुड़ी होती हैं और सेना से संबंधित ऐसी टिप्पणी पर आपत्ति हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में की थी सख्त टिप्पणी
अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी राहुल गांधी की टिप्पणी को लेकर सवाल उठाए थे। अदालत ने पूछा था कि उन्हें चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र पर कथित कब्जे की जानकारी किस आधार पर मिली और इस दावे के समर्थन में उनके पास क्या सबूत हैं।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को अंतरिम राहत देते हुए लखनऊ की निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। अदालत ने शिकायतकर्ता और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस भी जारी किया था। इसके बाद से मामले में प्रभावी सुनवाई नहीं हो सकी है। अब शिकायतकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मामले को जल्द सूचीबद्ध करने की मांग की है।
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