Last updated: February 5th, 2026 at 12:38 pm

ग्रामीण इलाकों में घर या किसी अन्य भवन का निर्माण करना आम लोगों के लिए हमेशा से एक चुनौती भरा काम रहा है। सबसे बड़ी परेशानी भवन का नक्शा पास कराने की प्रक्रिया को लेकर होती है। कहीं जिला पंचायत की आपत्ति, तो कहीं विकास प्राधिकरण से जुड़ा विवाद। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए अब उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में भवन नक्शा स्वीकृति की पूरी व्यवस्था को सरल और प्रभावी बनाने की दिशा में ठोस पहल की है।
पंचायती राज विभाग ने इस उद्देश्य से एक विशेष समिति और एक सेल का गठन किया है। इनका काम ग्रामीण क्षेत्रों में नक्शा पास कराने के दौरान सामने आ रही दिक्कतों को समझना और उनका व्यावहारिक समाधान सुझाना होगा। समिति को 15 फरवरी तक अपनी सिफारिशें सौंपनी हैं, ताकि नियमों और प्रक्रियाओं में जरूरी सुधार किया जा सके।
ग्रामीण विकास और नियमों का टकराव
बीते कुछ समय से विकास प्राधिकरण और जिला पंचायतों के अधिकार क्षेत्र को लेकर लगातार विवाद सामने आ रहे थे। कई मामलों में ऐसे भवनों पर कार्रवाई की गई, जो पहले से बने हुए थे और जिनके मालिक खुद को नियमों के दायरे में मानते थे। इसी विवाद को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आवास एवं शहरी नियोजन विभाग और पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की थी।
मुख्यमंत्री ने साफ कहा था कि ग्रामीण क्षेत्रों में सुनियोजित विकास जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर आम लोगों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। यदि कोई भवन जिला पंचायत या प्राधिकरण के बिल्डिंग बाइलाज के अनुसार बना है, तो उसे ध्वस्त नहीं किया जाना चाहिए। इसी सोच के साथ नियमों में संशोधन के निर्देश दिए गए।
विशेष समिति की भूमिका
मुख्यमंत्री के निर्देश पर पंचायती राज के विशेष सचिव राजेश कुमार त्यागी की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। इस समिति में सेवानिवृत्त अपर मुख्य अधिकारी विनय सिंह सिरोही, विशेष आमंत्री जीएस गोयल और अधीक्षण अभियंता प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है। समिति मौजूदा कानून, नियमावली और भवन उपविधियों का अध्ययन कर सुधार के सुझाव देगी।
पारदर्शिता और तकनीकी मजबूती पर जोर
समिति का एक अहम काम जिला पंचायतों में इम्पैनल किए जाने वाले आर्किटेक्ट और तकनीकी विशेषज्ञों की योग्यता और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना भी होगा। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्र विकास से जुड़े केंद्र सरकार के 2021 के दिशा निर्देश और मॉडल जोनिंग रेगुलेशंस 2025 का अध्ययन कर व्यावहारिक सुझाव दिए जाएंगे।
शिकायत निस्तारण के लिए नई व्यवस्था
मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जिला पंचायत अधिनियम 1961 और मानक उपविधियों में संशोधन का प्रस्ताव भी समिति देगी। इसके अलावा विकास प्राधिकरण और जिला पंचायतों के बीच बेहतर समन्वय और शिकायतों के त्वरित निस्तारण की प्रभावी प्रणाली पर भी काम किया जाएगा।समिति के सहयोग के लिए लखनऊ जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी प्रणव पाण्डेय की अध्यक्षता में एक सेल भी बनाई गई है। यह सेल जमीनी स्तर पर आने वाली समस्याओं को समिति तक पहुंचाने और समाधान लागू कराने में अहम भूमिका निभाएगी।
कुल मिलाकर यह पहल ग्रामीण नागरिकों के लिए राहत भरी है। यदि प्रस्तावित सुधार सही तरीके से लागू होते हैं, तो ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण से जुड़ी उलझनें कम होंगी और विकास की रफ्तार भी तेज होगी।
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