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दलित आरक्षण विवाद में चिराग पासवान पर HAM का पलटवार, संतोष सुमन बोले- ‘पहले अपना हिसाब जनता को बताइए’

पटना: बिहार में SC आरक्षण और ‘कोटे के अंदर कोटा’ को लेकर NDA के भीतर मतभेद की चर्चा के बीच
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पटना: बिहार में SC आरक्षण और ‘कोटे के अंदर कोटा’ को लेकर NDA के भीतर मतभेद की चर्चा के बीच हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) ने चिराग पासवान के रुख पर पलटवार किया है। बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने कहा कि जो लोग लंबे समय तक सत्ता में रहे हैं, उन्हें दूसरों से सवाल पूछने से पहले अपने काम का हिसाब जनता के सामने रखना चाहिए।

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    संतोष सुमन ने कहा, “हमारी किताब खुली है, अब अपनी किताब भी जनता के सामने खोलिए।” उन्होंने दावा किया कि जीतन राम मांझी और उनकी सरकार को जब भी महादलितों के लिए काम करने का अवसर मिला, उन्होंने योजनाओं को लागू करने की कोशिश की।

    महादलितों के लिए योजनाओं का किया जिक्र

    संतोष सुमन ने महादलित परिवारों के लिए चलाई गई कई सरकारी योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि करीब 1.95 लाख महादलित परिवारों को आवासीय प्लॉट उपलब्ध कराए गए और 5,717 एकड़ से अधिक जमीन का वितरण किया गया।

    उन्होंने महादलित आवास योजना, बच्चों की पोशाक, कौशल प्रशिक्षण, विकास मित्र और सामुदायिक भवन-सह-वर्कशेड जैसी योजनाओं का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक मुख्यमंत्री महादलित पोशाक योजना से करीब 14.71 लाख बच्चों को लाभ मिला, जबकि दशरथ मांझी कौशल विकास योजना के तहत 2.19 लाख से ज्यादा लोगों को अलग-अलग ट्रेड में प्रशिक्षण दिया गया।

    ‘विकास मित्र’ व्यवस्था का भी बताया उद्देश्य

    मंत्री ने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाने के लिए विकास मित्रों की व्यवस्था की गई। उनके अनुसार 9,875 विकास मित्र पद निर्धारित किए गए थे।

    उन्होंने ‘विकास रजिस्टर’ का भी जिक्र करते हुए कहा कि इसके माध्यम से महादलित परिवारों को बिजली, पानी, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, शौचालय और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाओं की स्थिति का आकलन किया गया।

    ‘कोटे में कोटा’ पर संतोष सुमन का रुख

    SC आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण यानी ‘कोटे में कोटा’ की बहस पर संतोष सुमन ने कहा कि इसका उद्देश्य किसी वर्ग का अधिकार छीनना नहीं, बल्कि उन समुदायों तक लाभ पहुंचाना है जो लंबे समय से पिछड़े और वंचित रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि इस बहस में यह देखना जरूरी है कि आरक्षण का फायदा किन वर्गों तक पहुंचा और कौन से समुदाय अभी भी पीछे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि महादलित मॉडल को पहले सरकारी नौकरियों के SC कोटे में अलग आरक्षण के रूप में लागू नहीं किया गया था, बल्कि इसका आधार लक्षित कल्याणकारी योजनाएं थीं।

    चिराग पासवान के बयान से बढ़ी बहस

    दरअसल, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर के प्रावधान को लेकर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि आरक्षण का आधार केवल आर्थिक स्थिति नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सामाजिक भेदभाव और वंचना भी है।

    चिराग पासवान के इस रुख के बीच जीतन राम मांझी और संतोष सुमन की ओर से SC समुदायों के भीतर अधिक वंचित वर्गों को अलग से लाभ देने की मांग को लेकर बहस तेज हो गई है। इससे NDA के भीतर दलित आरक्षण के मुद्दे पर अलग-अलग विचार सामने आए हैं।

    ‘हमने अपना हिसाब दे दिया, अब आपकी बारी’

    संतोष सुमन ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति या दल के खिलाफ नहीं है। उन्होंने बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीति का उद्देश्य संविधान के अधिकारों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना होना चाहिए।

    उन्होंने विरोधियों से सवाल किया कि पिछले दशकों में दलित और महादलित परिवारों के लिए जमीन, आवास, शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में कितना काम हुआ।

    संतोष सुमन ने कहा कि महादलितों के विकास से जुड़े आंकड़े सरकारी योजनाओं और दस्तावेजों में दर्ज हैं। उन्होंने अपने विरोधियों से भी भाषण के बजाय काम का हिसाब जनता के सामने रखने की मांग की। आरक्षण और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर यह बहस आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति के साथ-साथ NDA के भीतर भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है।

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