
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में संगम तट पर चल रहे माघ मेले में हर दिन आस्था का सैलाब उमड़ रहा है। लाखों श्रद्धालु पुण्य की डुबकी लगाने पहुंच रहे हैं, लेकिन इस बार माघ मेले की चर्चा सिर्फ स्नान और साधना तक सीमित नहीं है। इन दिनों मेले में सबसे ज्यादा नजरें टिकी हैं सतुआ बाबा पर, जिनकी पहचान अब सिर्फ एक संत के रूप में नहीं, बल्कि उनकी लग्ज़री कारों के कारण भी बन गई है।
डिफेंडर से मर्सिडीज तक, कारों ने खींचा ध्यान
अब तक सतुआ बाबा की डिफेंडर और पोर्श कारों की खूब चर्चा थी, लेकिन जब वह माघ मेले में मर्सिडीज कार के साथ पहुंचे, तो देखने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी। साधारण से शिविर में खड़ी चमचमाती कार लोगों के लिए कौतूहल का विषय बन गई। खास बात यह रही कि सतुआ बाबा ने अपने शिविर में कार की विधिवत पूजा-अर्चना करवाई, जिसे देखने के लिए श्रद्धालु और मेले में आए लोग रुकते नजर आए।
बदलते माघ मेले की तस्वीर
सतुआ बाबा का कहना है कि समय के साथ माघ मेले का स्वरूप भी बदल रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि पहले लोग मेले से खिलौने, गुब्बारे या छोटी-मोटी चीजें लेकर लौटते थे, लेकिन आज देश तरक्की की राह पर है। अब माघ मेले में आधुनिक सुविधाएं, बेहतर व्यवस्थाएं और यहां तक कि लग्ज़री वस्तुएं भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बन रही हैं। उनके मुताबिक यह बदलाव भारत की प्रगति का संकेत है, न कि आस्था से दूरी का।
सनातन की निरंतर यात्रा
सतुआ बाबा ने साफ शब्दों में कहा कि इसे केवल महंगी गाड़ियों का प्रदर्शन समझना गलत होगा। उनके अनुसार यह सनातन परंपरा की निरंतर चलने वाली यात्रा है, जो समय के साथ आगे बढ़ती रहती है। उन्होंने भारत को फिर से ‘सोने की चिड़िया’ बताते हुए कहा कि देश हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह तैयार है और आने वाला समय भारत के लिए स्वर्णिम होगा।
सकारात्मक सोच का संदेश
अपने संदेश में सतुआ बाबा ने समाज को मतभेद और विवाद से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने संवाद और सकारात्मक सोच को सबसे बड़ा रास्ता बताया। भारत की तुलना सूर्य से करते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग अंधकार फैलाने की कोशिश करेंगे, उन्हें समाज स्वीकार नहीं करेगा, लेकिन जो प्रकाश, आशा और अच्छाई का मार्ग दिखाएंगे, उनका खुले दिल से स्वागत होगा।
राजनीतिक हलचल भी बनी वजह
गौरतलब है कि सतुआ बाबा को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज रही है। प्रयागराज के डीएम से उनकी नजदीकी को लेकर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने नाराजगी जताई थी। इसके बावजूद खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सतुआ बाबा के शिविर में पहुंचना कई संकेत दे गया। इसके बाद से सतुआ बाबा माघ मेले ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की चर्चा का विषय बन गए हैं।
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