Last updated: October 10th, 2026 at 11:29 am

उत्तर प्रदेश में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। सलेमपुर लोकसभा सीट से सपा सांसद रमाशंकर राजभर ने सिकंदरपुर में भाजपा पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान पर पलटवार किया। उन्होंने नौजवानों से भाजपा और ‘भस्मासुर’ से दूर रहने की अपील की। वहीं, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट बंटवारे को लेकर उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन में सीटों की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण चुनाव में जीत हासिल करना है।
‘नौजवानों, भाजपा और भस्मासुर से दूर रहो’
सपा सांसद रमाशंकर राजभर ने कहा कि उत्तर प्रदेश में एनडीए और पीडीए के बीच राजनीतिक मुकाबला जारी है। उन्होंने पीडीए के साथ आने के इच्छुक लोगों का स्वागत करते हुए विपक्षी एकजुटता पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से नौजवानों को समाजवादी पार्टी और शराब से दूर रहने की सलाह दिए जाने के संदर्भ में राजभर ने जवाब दिया। उन्होंने कहा, “मैं तो कहता हूं कि नौजवानों, भस्मासुर और भाजपा से दूर रहो।” उनका यह बयान भाजपा और सपा के बीच जारी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा है।
‘जनता भाजपा की राजनीति का जवाब देगी’
भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए सपा सांसद ने कहा कि सरकार अपनी नाकामियों के लिए समाजवादी पार्टी को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश करती है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के खिलाफ जनता में नाराजगी है और आने वाले समय में लोग इसका जवाब देंगे।
राजभर ने विपक्षी दलों और पीडीए के साथ आने वाले लोगों से एकजुट रहने की अपील भी की। उनके बयान से साफ है कि सपा नेता भाजपा के खिलाफ राजनीतिक मुद्दों को लेकर जनता के बीच अपनी बात रखने की तैयारी में हैं।
कांग्रेस-सपा गठबंधन में सीट से ज्यादा जीत अहम
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीटों के बंटवारे के सवाल पर रमाशंकर राजभर ने कहा कि इंडिया गठबंधन मजबूती से खड़ा है और उत्तर प्रदेश में दोनों दलों के बीच गठबंधन कायम है।
उन्होंने बताया कि सीटों को लेकर फैसला इस आधार पर किया जाएगा कि किस क्षेत्र में किस पार्टी की जीत की संभावना बेहतर है। इसके लिए गठबंधन की कोर कमेटी विचार करेगी और उसी के अनुसार सीटों का बंटवारा तय होगा।
सपा सांसद के मुताबिक, इस मामले में अंतिम निर्णय कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से लिया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि गठबंधन की प्राथमिकता सीटों की संख्या पर जोर देने के बजाय चुनाव में जीत सुनिश्चित करना है।
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