Last updated: March 14th, 2026 at 08:07 am

पटना: सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने शनिवार को बिहार के नए राज्यपाल के रूप में शपथ ली। वे राज्य के 43वें राज्यपाल बने हैं। राजधानी पटना के लोक भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और दोनों उपमुख्यमंत्री भी मौजूद रहे। पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन ने सैयद अता हसनैन को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस मौके पर राज्य सरकार के कई मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।
चार दशक का सैन्य अनुभव
सैयद अता हसनैन भारतीय सेना के वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों में गिने जाते हैं। उन्होंने लगभग 40 वर्षों तक सेना में सेवा दी और अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। रणनीतिक नेतृत्व और सुरक्षा मामलों की गहरी समझ के कारण वे सेना में एक प्रभावशाली अधिकारी के रूप में जाने जाते रहे हैं। अपने सैन्य करियर के दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर में कई अहम पदों पर काम किया। उनके नेतृत्व में सेना ने सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ सामाजिक पहल भी शुरू कीं। इन पहलों के तहत युवाओं को शिक्षा, खेल और रोजगार से जोड़ने की कोशिश की गई, ताकि उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
सेवानिवृत्ति के बाद भी राष्ट्रीय सेवा जारी
सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी सैयद अता हसनैन राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मामलों से जुड़े रहे। उन्हें राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) का सदस्य बनाया गया, जहां उन्होंने आपदा प्रबंधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों और नीतियों में योगदान दिया। अब बिहार के राज्यपाल के रूप में उनके सामने संवैधानिक जिम्मेदारियों का महत्वपूर्ण दायित्व है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि उनका प्रशासनिक और रणनीतिक अनुभव राज्य के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
मुस्लिम समुदाय से फिर राज्यपाल
इससे पहले 25 दिसंबर 2024 को आरिफ मोहम्मद खान को बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। उनके रूप में बिहार को करीब 26 वर्षों बाद मुस्लिम समुदाय से राज्यपाल मिला था। इससे पहले ए. आर. किदवई वर्ष 1998 तक बिहार के राज्यपाल रह चुके थे। अब सैयद अता हसनैन के राज्यपाल बनने के बाद एक बार फिर मुस्लिम समुदाय से यह पद चर्चा में है।
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