Last updated: January 15th, 2026 at 12:52 pm

बिहार की राजनीति में इन दिनों एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। इसकी वजह हैं राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के वरिष्ठ नेता और लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि तेज प्रताप यादव की नज़दीकी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से बढ़ रही है। उनकी हालिया गतिविधियों, बयानों और कुछ मुलाकातों ने सियासी माहौल को गर्म कर दिया है। खास बात यह है कि इस पूरे मामले पर आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे अटकलों को और हवा मिल रही है।
तेज प्रताप यादव अपनी अलग और बेबाक शैली के लिए जाने जाते हैं। वे कई बार ऐसे बयान दे चुके हैं, जो पार्टी लाइन से अलग माने जाते हैं। हाल के दिनों में उनकी कुछ सोशल मीडिया पोस्ट, सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिए गए बयान और राजनीतिक संकेतों को बीजेपी के प्रति नरम रुख के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि तेज प्रताप यादव ने खुलकर यह नहीं कहा है कि वे बीजेपी में शामिल होने जा रहे हैं, लेकिन उनकी गतिविधियाँ राजनीतिक विश्लेषकों को सोचने पर मजबूर कर रही हैं।
आरजेडी के अंदर भी इस मुद्दे को लेकर बेचैनी देखी जा रही है। पार्टी के कई नेता खुलकर कुछ कहने से बच रहे हैं, लेकिन अंदरखाने चर्चा है कि अगर तेज प्रताप यादव का रुख बदला तो इसका असर पार्टी की एकजुटता पर पड़ सकता है। वहीं, तेजस्वी यादव, जो आरजेडी के प्रमुख चेहरे और बिहार के नेता प्रतिपक्ष हैं, उनके सामने भी यह एक बड़ी राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। भाई के राजनीतिक कदमों का असर तेजस्वी की रणनीति और छवि पर भी पड़ सकता है।
लालू प्रसाद यादव की चुप्पी इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी हुई है। आमतौर पर लालू यादव किसी भी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर अपनी राय जरूर रखते हैं, लेकिन इस बार उनका मौन कई सवाल खड़े कर रहा है। कुछ लोग इसे पारिवारिक मामला मानकर देख रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि लालू यादव स्थिति को समझने और सही समय का इंतजार कर रहे हैं। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि लालू यादव कोई भी फैसला सोच-समझकर ही लेंगे, क्योंकि इसका सीधा असर पार्टी और उनके राजनीतिक भविष्य पर पड़ सकता है।
बीजेपी की ओर से भी इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि विपक्ष की किसी भी कमजोरी को भुनाने का मौका बीजेपी हाथ से नहीं जाने देगी। अगर तेज प्रताप यादव और बीजेपी के बीच नज़दीकी बढ़ती है, तो यह बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव ला सकती है।
कुल मिलाकर, तेज प्रताप यादव की गतिविधियों ने बिहार की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। अभी यह साफ नहीं है कि यह सब सिर्फ राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है या आने वाले समय में कोई बड़ा फैसला देखने को मिलेगा। लेकिन इतना तय है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीति और तेज होगी, और सबकी नजरें तेज प्रताप यादव, तेजस्वी यादव और लालू प्रसाद यादव के अगले कदम पर टिकी रहेंगी।
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