Last updated: December 24th, 2025 at 12:36 pm

उत्तर प्रदेश भाजपा में इन दिनों संगठन को लेकर हलचल तेज हो गई है। पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने पद संभालते ही वरिष्ठ नेताओं, मंत्रियों और संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों के साथ बैठकें शुरू कर दी हैं। इन बैठकों का मकसद साफ है—पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले हर कार्यकर्ता को सक्रिय करना।
प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पंकज चौधरी ने यह संकेत दिया है कि अब पार्टी में केवल नाम के पदाधिकारी नहीं, बल्कि काम करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं को अहमियत मिलेगी। बैठकों में संगठन की मौजूदा स्थिति, बूथ स्तर की मजबूती, कार्यकर्ताओं की समस्याएं और जनता से जुड़े मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई। खास तौर पर यह जोर दिया गया कि भाजपा की ताकत उसका कैडर है, जिसे और मजबूत करने की जरूरत है।
बीजेपी नेतृत्व मानता है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में चुनाव जीतने के लिए केवल सरकार की उपलब्धियां गिनाना काफी नहीं होता। इसके लिए मजबूत संगठन, सक्रिय कार्यकर्ता और सही रणनीति जरूरी होती है। इसी वजह से पंकज चौधरी ने जिलों और मंडलों से फीडबैक लेने की प्रक्रिया शुरू की है। संगठन के भीतर जो भी कमजोरियां हैं, उन्हें समय रहते दूर करने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, विपक्ष इसे अलग नजरिए से देख रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि भाजपा में यह कवायद अंदरूनी तनाव और असंतोष का संकेत है। उनके अनुसार, पार्टी के भीतर कई नेता और कार्यकर्ता टिकट, पद और जिम्मेदारियों को लेकर नाराज हैं, और नेतृत्व उसी असंतोष को संभालने में जुटा है। विपक्ष यह भी दावा कर रहा है कि लंबे समय से सत्ता में रहने के कारण भाजपा के संगठन में ढिलाई आई है।
वहीं भाजपा इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रही है। पार्टी का कहना है कि संगठनात्मक बैठकें और समीक्षा एक सामान्य प्रक्रिया है, जो हर चुनाव से पहले होती है। भाजपा नेताओं का दावा है कि यह हलचल कमजोरी नहीं, बल्कि मजबूती की निशानी है। उनका कहना है कि पार्टी समय रहते अपनी रणनीति को दुरुस्त कर रही है ताकि जनता के बीच मजबूत संदेश दिया जा सके।राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, 2027 का विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए बेहद अहम होगा। ऐसे में संगठन को चुस्त-दुरुस्त करना पार्टी की प्राथमिकता बन गई है। नए प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में यह प्रयास किया जा रहा है कि सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बने और कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा रहे।कुल मिलाकर, यूपी भाजपा में चल रही यह हलचल आने वाले चुनावों की तैयारी का हिस्सा मानी जा रही है। आने वाले समय में यह साफ हो जाएगा कि यह रणनीति पार्टी को कितना फायदा पहुंचाती है। लेकिन इतना तय है कि 2027 से पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति और ज्यादा सक्रिय और दिलचस्प होने वाली है।
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