Last updated: December 23rd, 2025 at 05:31 pm

उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष पंकज चौधरी ने हाल ही में समाजवादी पार्टी और इसके नेता अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी में परिवारवाद बहुत गहरा है और पार्टी में निर्णय केवल कुछ परिवार के सदस्यों के नियंत्रण में होते हैं। पंकज चौधरी का यह बयान राजनीतिक माहौल में हलचल पैदा कर रहा है।
पंकज चौधरी ने विधानसभा और सार्वजनिक मंचों पर साफ कहा कि समाजवादी पार्टी में सत्ताधारी परिवार की भूमिका इतनी मजबूत है कि पार्टी में अन्य नेताओं को निर्णय लेने या अपनी राय रखने की गुंजाइश नहीं मिलती। उनका कहना था कि यही कारण है कि पार्टी के अंदर लोकतंत्र कमजोर है और जनता की आवाज़ को महत्व नहीं मिलता। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे परिवारवाद और सत्ता केंद्रीकरण के कारण ही समाजवादी पार्टी चुनावों में असफल होती रही है।
भाजपा अध्यक्ष ने अपने बयान में यह भी कहा कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप समाजवादी पार्टी की पहचान बन चुके हैं। हर चुनाव में आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चलता रहता है और जनता को विकास के मुद्दों से ध्यान हटाकर विवादों में उलझाया जाता है। उनका कहना था कि भाजपा की प्राथमिकता हमेशा विकास और जनकल्याण रही है, जबकि समाजवादी पार्टी सिर्फ विवाद और आरोप-प्रत्यारोप में उलझी रहती है।
पंकज चौधरी ने यह भी कहा कि भाजपा एक संगठनात्मक रूप से मजबूत पार्टी है, जिसमें नेताओं और कार्यकर्ताओं को निर्णय लेने की स्वतंत्रता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे जनता तक अपने संदेश को साफ और स्पष्ट तरीके से पहुंचाएं। उनका मानना है कि परिवारवाद और विवादित राजनीति से जनता अब तंग आ चुकी है और आने वाले समय में विकास और अच्छे शासन की राजनीति को ही महत्व देगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि पंकज चौधरी का यह बयान सिर्फ पार्टी की ओर से एक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। चुनावों के दृष्टिकोण से भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि वह पारदर्शिता और संगठनात्मक लोकतंत्र के पक्ष में है, जबकि विपक्ष में परिवारवाद और विवाद के मामले अधिक हैं।
कुल मिलाकर, पंकज चौधरी का यह हमला समाजवादी पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा विकास, संगठन और जनता की भलाई को अपनी प्राथमिकता मानती है और परिवारवाद और आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति को जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी। इससे साफ होता है कि यूपी में आने वाले चुनावों में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और परिवारवाद जैसे मुद्दों पर तेज बहस होने वाली है और भाजपा इसे अपने पक्ष में रूपांतरित करने की कोशिश करेगी।
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