Last updated: December 23rd, 2025 at 05:43 pm

उत्तर प्रदेश विधानसभा में समाजवादी पार्टी (SP) की विधायक रागिनी सोनकर ने भाजपा सरकार पर कड़ी आलोचना की। उन्होंने विधानसभा में कई मुद्दों पर अपनी बात रखते हुए सरकार की नीतियों और प्रधानमंत्री योगी के नेतृत्व को निशाने पर लिया। उनकी चर्चा मुख्य रूप से शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित रही।
रागिनी सोनकर ने कहा कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। उनके अनुसार, सरकारी स्कूलों में शिक्षक समय पर नियुक्त नहीं किए जा रहे हैं और बच्चों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षा क्षेत्र में धन का सही उपयोग नहीं हो रहा और सरकारी योजनाएं जनता तक पूरी तरह नहीं पहुंच रही हैं। उनका कहना था कि इससे विद्यार्थियों और उनके परिवारों को सीधा नुकसान हो रहा है।
इसके अलावा रागिनी सोनकर ने स्वास्थ्य क्षेत्र की भी स्थिति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में डॉक्टर और दवाइयों की कमी है, और ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं ठीक से काम नहीं कर रही हैं। उनका मानना था कि जनता को आधारभूत स्वास्थ्य सुविधाएं देने में सरकार असफल रही है।
विधायक ने विधानसभा में सामाजिक कल्याण योजनाओं पर भी टिप्पणी की। उनका आरोप था कि योजनाओं का लाभ केवल कुछ चुने हुए लोगों तक ही पहुंच रहा है और आम जनता इनका लाभ नहीं उठा पा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता की कमी है और यह जनता के विश्वास को कमजोर कर रहा है।
रागिनी सोनकर ने भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री योगी के नेतृत्व पर सीधे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने में सरकार विफल रही है। उनका यह भी आरोप था कि सत्ता में रहते हुए विकास कार्य अपेक्षित गति से नहीं हो रहे और सरकारी नीतियों में आम लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
उनके इस भाषण ने विधानसभा में राजनीतिक हलचल पैदा कर दी। विपक्ष और कुछ विधायक उनके बयान का समर्थन कर रहे थे, जबकि भाजपा के विधायक अपने पक्ष में जवाब देने लगे। इस बहस ने यह स्पष्ट कर दिया कि आगामी समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति में शिक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण योजनाओं के मुद्दे और अधिक महत्वपूर्ण होने वाले हैं।
कुल मिलाकर, रागिनी सोनकर का यह भाषण भाजपा सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जनता की समस्याओं को हल करना ही सरकार की असली जिम्मेदारी है। इस बहस ने विधानसभा में यह संदेश भी दिया कि विपक्ष सरकार की नीतियों पर कड़ी नजर रखे हुए है और जनता के हित के मुद्दों पर लगातार सवाल उठाएगा।
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