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यूपी की सियासत में फिर करवट: MOTN सर्वे ने बढ़ाई अखिलेश की चिंता, NDA की मजबूत वापसी के संकेत

विपक्षी गठबंधन INDIA की सबसे बड़ी कमजोरी और साथ ही सबसे बड़ा सवाल हमेशा से नेतृत्व को लेकर रहा है।
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विपक्षी गठबंधन INDIA की सबसे बड़ी कमजोरी और साथ ही सबसे बड़ा सवाल हमेशा से नेतृत्व को लेकर रहा है। कौन होगा वह चेहरा जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने खड़ा हो सके। इस सवाल पर ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और अखिलेश यादव के समर्थक अपनी अपनी दलीलें देते रहे हैं। लेकिन जनवरी 2026 के MOTN सर्वे ने इस बहस को एक नई दिशा दे दी है।

Table of Contents

    राहुल गांधी क्यों बनते जा रहे हैं पहली पसंद

    MOTN के ताजा सर्वे में जब लोगों से पूछा गया कि INDIA गठबंधन की अगुवाई के लिए सबसे बेहतर नेता कौन होगा तो 28.6 प्रतिशत लोगों ने राहुल गांधी पर भरोसा जताया। यह आंकड़ा सिर्फ एक सर्वे संख्या नहीं है बल्कि राहुल गांधी की राजनीति में बदलती छवि का संकेत है। अगस्त 2023 में जहां उनका समर्थन 23.6 प्रतिशत था वहीं अगस्त 2024 में यह बढ़कर 32.4 प्रतिशत तक पहुंच गया था। जनवरी 2026 में भले ही यह आंकड़ा थोड़ा घटकर 28 प्रतिशत पर आया हो लेकिन यह अब भी विपक्ष के सभी नेताओं से काफी आगे है।

    राहुल गांधी को लेकर जनता की सोच में यह बदलाव उनकी लगातार सक्रिय राजनीति, भारत जोड़ो यात्राओं और आक्रामक संसदीय भूमिका का नतीजा माना जा रहा है। वे अब केवल एक पार्टी नेता नहीं बल्कि विपक्ष की साझा आवाज के रूप में देखे जाने लगे हैं।

    ममता बनर्जी का सिमटता प्रभाव

    तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के लिए यह सर्वे राहत से ज्यादा चिंता बढ़ाने वाला है। 2023 में 14.8 प्रतिशत लोगों की पसंद रहीं ममता बनर्जी अब गिरकर 7.1 प्रतिशत पर आ गई हैं। इसका साफ मतलब है कि उनका प्रभाव राष्ट्रीय स्तर पर सीमित होता जा रहा है। बंगाल में मजबूत पकड़ के बावजूद देशव्यापी नेतृत्व की भूमिका में उन्हें उतना समर्थन नहीं मिल पा रहा जितना पहले मिलता दिख रहा था।

    अरविंद केजरीवाल की सबसे बड़ी गिरावट

    अगर सबसे तेज गिरावट की बात करें तो वह अरविंद केजरीवाल के हिस्से आई है। अगस्त 2023 में जहां 14.6 प्रतिशत लोग उन्हें विपक्ष का चेहरा मान रहे थे वहीं जनवरी 2026 में यह आंकड़ा सिर्फ 6 प्रतिशत रह गया है। दिल्ली और पंजाब से बाहर उनकी स्वीकार्यता लगातार कमजोर पड़ती नजर आ रही है। यह संकेत देता है कि क्षेत्रीय सफलता को राष्ट्रीय नेतृत्व में बदलना उनके लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

    अखिलेश यादव का स्थिर लेकिन सीमित दायरा

    समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के आंकड़ों में उतार चढ़ाव तो है लेकिन एक स्थिरता भी दिखती है। जनवरी 2026 में 6.1 प्रतिशत लोग उन्हें गठबंधन का नेता मानते हैं। यह संख्या बहुत ज्यादा नहीं है लेकिन पूरी तरह गिरती भी नहीं दिखती। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में मजबूत पकड़ के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर उनकी अपील अभी सीमित है।

    प्रियंका गांधी की भूमिका पर असमंजस

    प्रियंका गांधी को लेकर जनता की राय में लगातार उतार चढ़ाव देखा गया है। जनवरी 2026 में 3.8 प्रतिशत लोग उन्हें INDIA गठबंधन की अगुवाई के लिए सही मानते हैं। यह दर्शाता है कि जनता उन्हें एक प्रभावी नेता के तौर पर देखती तो है लेकिन शीर्ष नेतृत्व की भूमिका में अभी पूरी तरह स्वीकार नहीं कर पाई है।

    MOTN सर्वे के नतीजे साफ संकेत देते हैं कि विपक्ष के संभावित चेहरे की दौड़ में राहुल गांधी फिलहाल सबसे आगे हैं। उन्होंने ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और अखिलेश यादव जैसे बड़े क्षेत्रीय नेताओं पर स्पष्ट बढ़त बना ली है। यह बढ़त सिर्फ आंकड़ों की नहीं बल्कि जनता की बदलती राजनीतिक उम्मीदों की भी कहानी कहती है।

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