Last updated: December 31st, 2025 at 10:00 am

उत्तर प्रदेश सरकार ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने एक नई योजना शुरू की है, जिसके तहत लगभग 3 करोड़ महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जाएगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना, उन्हें रोजगार के अवसर देना और उनकी आमदनी को बढ़ाना है। सरकार का मानना है कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होंगी, तो परिवार और समाज दोनों का विकास तेजी से होगा।
स्वयं सहायता समूह ऐसे छोटे समूह होते हैं, जिनमें महिलाएं मिलकर बचत करती हैं और जरूरत पड़ने पर आपस में ऋण भी लेती हैं। इन समूहों के जरिए महिलाएं छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू कर सकती हैं, जैसे सिलाई-कढ़ाई, अगरबत्ती निर्माण, पापड़-अचार बनाना, डेयरी, बकरी पालन, मुर्गी पालन और अन्य घरेलू उद्योग। सरकार इन समूहों को प्रशिक्षण, आर्थिक मदद और बाजार से जोड़ने में सहयोग करेगी।
इस योजना के तहत ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की महिलाओं को शामिल किया जाएगा। खासतौर पर गरीब, पिछड़े और जरूरतमंद परिवारों की महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि महिलाओं को केवल सहायता न दी जाए, बल्कि उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर मिले। इसके लिए कौशल विकास कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे, ताकि महिलाएं नए काम सीख सकें और अपनी क्षमता के अनुसार रोजगार चुन सकें।
योजना में महिलाओं को बैंक से आसानी से ऋण दिलाने की व्यवस्था भी की गई है। स्वयं सहायता समूहों को कम ब्याज दर पर लोन मिलेगा, जिससे महिलाएं बिना किसी डर के अपना छोटा व्यवसाय शुरू कर सकें। इसके अलावा, सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी भी इन्हीं समूहों के माध्यम से महिलाओं तक पहुंचाई जाएगी। इससे महिलाओं को सरकारी लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से मिल सकेगा।
सरकार का कहना है कि यह अभियान केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने का भी एक प्रयास है। जब महिलाएं खुद कमाने लगती हैं, तो परिवार में उनकी भूमिका और सम्मान दोनों बढ़ते हैं। इससे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। कई जगहों पर स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं गांव और समाज के फैसलों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
इस योजना से राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। जब लाखों महिलाएं छोटे व्यवसाय शुरू करेंगी, तो स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे गांवों से शहरों की ओर पलायन भी कम हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से आर्थिक विकास ज्यादा टिकाऊ और संतुलित होता है।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम महिलाओं के भविष्य को सुरक्षित और मजबूत बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। यदि योजना को सही तरीके से लागू किया गया, तो यह लाखों महिलाओं की जिंदगी बदल सकती है और उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ सकती है।
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