Last updated: October 9th, 2026 at 12:49 pm

मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव से निकलकर भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी बनने तक का अंजलि सोंधिया का सफर संघर्ष, हौसले और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। महज 15 साल की उम्र में उनकी सगाई कर दी गई थी और शादी की तैयारियां भी शुरू हो गई थीं। इसके बाद उन्होंने पढ़ाई जारी रखने का फैसला किया।
UPSC सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा में लगातार तीन बार असफलता मिली और साल 2023 में पिता का निधन भी हो गया। इन मुश्किलों के बावजूद अंजलि ने हार नहीं मानी और चौथे प्रयास में भारतीय वन सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 9 हासिल कर अपना सपना पूरा किया।
किसान परिवार में जन्मीं, पढ़ाई से बनाई अलग पहचान
अंजलि सोंधिया मध्य प्रदेश के चंद्रपुरा गांव की रहने वाली हैं और किसान परिवार से आती हैं। बचपन से ही उनकी रुचि पढ़ाई में थी। उन्होंने आठवीं तक की शिक्षा गांव के स्कूल से हासिल की। इसके बाद ब्यावरा में आगे की पढ़ाई की और 12वीं के बाद इंदौर चली गईं।
अपने आसपास कई लड़कियों को कम उम्र में पढ़ाई छोड़कर शादी करते देखकर अंजलि ने तय किया कि वह शिक्षा और मेहनत के दम पर अपनी अलग पहचान बनाएंगी। हालांकि, उनका यह फैसला आसान नहीं था। परिवार और समाज की अपेक्षाओं के बीच उन्हें अपने सपने को आगे बढ़ाने के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ा।
15 साल की उम्र में सगाई, मां ने बेटी के सपने को चुना
अंजलि जब दसवीं कक्षा में पढ़ रही थीं, तभी महज 15 साल की उम्र में उनकी सगाई कर दी गई। शादी की तैयारियां आगे बढ़ने लगी थीं और शादी के कार्ड छपने तक की बात सामने आ गई थी।
इस मोड़ पर उनकी मां ने बेटी की पढ़ाई और भविष्य को प्राथमिकता दी। उन्होंने सगाई तोड़ने का फैसला किया, जिससे अंजलि को आगे पढ़ने और अपने लक्ष्य की दिशा में काम करने का मौका मिला। इसके बाद अंजलि ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और UPSC की तैयारी में जुट गईं।
UPSC में तीन बार मिली असफलता, फिर पिता को खोया
भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना लेकर अंजलि ने UPSC की तैयारी शुरू की, लेकिन शुरुआती प्रयासों में उन्हें निराशा हाथ लगी। साल 2021, 2022 और 2023 में वह सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा पास नहीं कर सकीं।
लगातार तीन असफलताओं के बीच उन पर शादी करने का दबाव भी बना रहा। साल 2023 उनके लिए बेहद कठिन साबित हुआ। इसी साल प्रारंभिक परीक्षा में तीसरी बार असफल होने के बाद उनके पिता का निधन हो गया। एक ओर परीक्षा में मिली नाकामी और दूसरी ओर पिता को खोने का दुख—इन परिस्थितियों ने उनकी राह और मुश्किल बना दी।
इस कठिन दौर में उनकी मां ने उनका हौसला बनाए रखा और उन्हें अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया।
चौथे प्रयास में पलटी कहानी, IFS परीक्षा में AIR 9
लगातार असफलताओं और निजी जीवन के मुश्किल दौर के बावजूद अंजलि ने तैयारी नहीं छोड़ी। चौथे प्रयास में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा के साथ भारतीय वन सेवा परीक्षा भी दी। इस बार उन्हें बड़ी सफलता मिली और उन्होंने भारतीय वन सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 9 हासिल की।
अंजलि की कहानी उस संघर्ष को दिखाती है, जिसमें एक तरफ कम उम्र में शादी का दबाव था, दूसरी तरफ परीक्षा में लगातार असफलताएं और परिवार में पिता को खोने का दुख। इन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और अपने लक्ष्य तक पहुंचीं।
15 साल की उम्र में जिसकी शादी तय कर दी गई थी, उसी अंजलि ने मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर अपने लिए एक अलग भविष्य बनाया। भारतीय वन सेवा परीक्षा में AIR 9 हासिल करना उनके लंबे संघर्ष और निरंतर प्रयास का परिणाम बना।
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