Human Live Media

HomeBlogउत्तराखंड सरकार की सख्त एसओपी, सरकारी कर्मचारियों से बदसलूकी पर FIR, आरोपी होंगे ब्लैकलिस्ट

उत्तराखंड सरकार की सख्त एसओपी, सरकारी कर्मचारियों से बदसलूकी पर FIR, आरोपी होंगे ब्लैकलिस्ट

देहरादून। शिक्षा निदेशालय में निदेशक के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद उत्तराखंड सरकार ने सरकारी कार्मिकों की सुरक्षा
Uttarakhand_forest_fire_CM_Pushkar_Dhami_PTI_1718335284901_1736854522906

देहरादून। शिक्षा निदेशालय में निदेशक के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद उत्तराखंड सरकार ने सरकारी कार्मिकों की सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धनकी ओर से नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की गई है, जिसके तहत राजकीय कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा, प्रवेश नियंत्रण और आपात कार्रवाई की स्पष्ट व्यवस्था तय की गई है।

Table of Contents

    दुर्व्यवहार पर दर्ज होगी FIR

    नई एसओपी के अनुसार, ड्यूटी पर तैनात किसी भी कर्मचारी के साथ धक्का-मुक्की, मारपीट या अभद्र भाषा का प्रयोग दंडनीय अपराध माना जाएगा। ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता के तहत तत्काल प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। आरोपी को कार्यालय परिसर से तुरंत बाहर किया जाएगा और उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा।

    सुरक्षा ऑडिट और सख्त निगरानी

    गृह विभाग आवश्यकता पड़ने पर संवेदनशील कार्यालयों का वार्षिक सुरक्षा ऑडिट भी कराएगा। हालांकि सचिवालय और विधानसभा जैसे उच्च सुरक्षा वाले परिसरों में, जहां पहले से सख्त इंतजाम हैं, वहां यह एसओपी लागू नहीं होगी।

    • किन पर लागू होगी नई व्यवस्था?
    • यह नियम आमजन, निजी ठेकेदारों, जनप्रतिनिधियों और उनके समर्थकों सहित सभी आगंतुकों पर लागू होगा।
    • कार्यालय परिसर में आम नागरिकों के वाहनों का प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।
    • वीआईपी या दिव्यांगजन के वाहनों को अंडर-व्हीकल मिरर से जांच के बाद ही अनुमति मिलेगी।
    • सभी कार्यालयों में डिजिटल विजिटर मैनेजमेंट सिस्टम (VMS) लागू किया जाएगा।
    • जनप्रतिनिधि के साथ अधिकतम तीन लोग ही अधिकारी के कक्ष में प्रवेश कर सकेंगे।
    • उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और उनकी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जाएगी, ताकि आवश्यकता पड़ने पर फॉरेंसिक पहचान सुनिश्चित की जा सके।

    घटना होने पर क्या होगी कार्रवाई?

    यदि किसी कार्यालय में कर्मचारी के साथ दुर्व्यवहार होता है तो घटनास्थल को तुरंत सील किया जाएगा। क्षतिग्रस्त दस्तावेज या फर्नीचर जैसे साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। संबंधित फुटेज विवेचक को सौंपी जाएगी।
    घायल कर्मचारी को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी और मेडिको-लीगल केस दर्ज किया जाएगा। ऐसे मामलों की जांच इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी करेंगे और दो माह के भीतर विवेचना पूरी करनी होगी।

    सुरक्षा को प्राथमिकता

    सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को सुरक्षित कार्य वातावरण देना और प्रशासनिक कार्यों में व्यवधान रोकना है। सख्त प्रावधानों के जरिए यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि राजकीय कार्यालयों में अनुशासन और कानून व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा।

    Loading

    Comments are off for this post.