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बंगाल में नई BJP सरकार का बड़ा फैसला, धर्म आधारित भत्ता योजनाओं पर लगी रोक

पश्चिम बंगाल में नई भाजपा सरकार ने सत्ता संभालने के बाद कई बड़े प्रशासनिक फैसले लेने शुरू कर दिए हैं।
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पश्चिम बंगाल में नई भाजपा सरकार ने सत्ता संभालने के बाद कई बड़े प्रशासनिक फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य में धर्म के आधार पर चल रही वित्तीय सहायता योजनाओं को बंद करने का निर्णय लिया गया।

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    सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि अब राज्य में कल्याणकारी योजनाओं का आधार धर्म नहीं बल्कि जरूरत और विकास होगा। इस फैसले को बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

    इमाम, मुअज्जिन और पुजारियों की भत्ता योजना बंद

    नई सरकार ने पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार के दौरान शुरू की गई इमाम, मुअज्जिन और पुजारियों के मासिक भत्ते की योजना को समाप्त करने का फैसला लिया है।

    सरकार का कहना है कि राज्य की आर्थिक स्थिति को देखते हुए संसाधनों का उपयोग विकास और बुनियादी जरूरतों पर किया जाएगा। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि छात्रों से जुड़ी छात्रवृत्ति योजनाओं में कोई कटौती नहीं होगी।

    आर्थिक सुधार और नई योजनाओं पर जोर

    कैबिनेट बैठक के बाद सरकार की ओर से बताया गया कि महिलाओं के लिए नई ‘अन्नपूर्णा भंडार’ योजना शुरू की जाएगी। इसके तहत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह आर्थिक सहायता दी जाएगी और सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

    सरकार ने यह भी कहा कि पुरानी सामाजिक योजनाओं के लाभार्थियों को नई योजना में शामिल करने की प्रक्रिया आसान रखी जाएगी।

    कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग को मंजूरी

    राज्य सरकार ने कर्मचारियों से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों पर भी कदम उठाया है। कैबिनेट ने सातवें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। सरकार का दावा है कि इससे लाखों कर्मचारियों और पेंशनधारकों को फायदा मिलेगा।

    OBC सूची की होगी नई समीक्षा

    राज्य सरकार ने ओबीसी सूची को लेकर भी बड़ा फैसला लिया है। Calcutta High Court के फैसले के बाद अब नई विशेषज्ञ समिति बनाकर ओबीसी आरक्षण की पात्रता की समीक्षा की जाएगी। सरकार का कहना है कि नई प्रक्रिया पारदर्शी और कानूनी मानकों के अनुसार होगी।

    राजनीतिक बहस तेज

    इन फैसलों के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। विपक्ष सरकार पर राजनीतिक एजेंडा चलाने का आरोप लगा रहा है, जबकि भाजपा इसे सुशासन और आर्थिक सुधार की दिशा में जरूरी कदम बता रही है।

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