Last updated: June 26th, 2026 at 05:08 pm

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जातीय जनगणना और सामाजिक न्याय के मुद्दे को लेकर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए देश में पारदर्शी और व्यापक जातीय जनगणना आवश्यक है। अखिलेश यादव ने दावा किया कि सही आंकड़ों के आधार पर ही सरकारें शिक्षा, रोजगार और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सभी वर्गों तक समान रूप से पहुंचा सकती हैं।
अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी लंबे समय से जातीय जनगणना की मांग करती रही है। उनका कहना है कि जब तक विभिन्न सामाजिक वर्गों की वास्तविक स्थिति का वैज्ञानिक आंकलन नहीं होगा, तब तक संसाधनों और अवसरों का न्यायसंगत वितरण संभव नहीं होगा। उन्होंने सरकार से इस विषय पर स्पष्ट नीति अपनाने की मांग की।
सपा प्रमुख ने अपने बयान में युवाओं, किसानों और पिछड़े वर्गों से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय केवल एक राजनीतिक नारा नहीं बल्कि संविधान की भावना से जुड़ा विषय है। सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जिनसे समाज के सभी वर्गों को समान अवसर मिल सकें।
भाजपा ने अखिलेश यादव के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार सभी वर्गों के विकास के लिए बिना किसी भेदभाव के काम कर रही है। भाजपा नेताओं का कहना है कि सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंच रहा है और विकास ही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जातीय जनगणना का मुद्दा उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रहा है। विभिन्न राजनीतिक दल इसे अलग-अलग दृष्टिकोण से देखते हैं और चुनावी राजनीति में भी यह मुद्दा महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर प्रदेश में सामाजिक समीकरण हमेशा से चुनावी रणनीतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। यही कारण है कि जातीय जनगणना, आरक्षण और सामाजिक न्याय जैसे विषय समय-समय पर राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ जाते हैं।
दूसरी ओर कांग्रेस सहित कुछ अन्य विपक्षी दलों ने भी सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा है। उनका कहना है कि नीतियों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए और इसके लिए सटीक आंकड़ों का होना आवश्यक है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि 2027 विधानसभा चुनाव के करीब आते-आते सामाजिक न्याय, रोजगार, शिक्षा और किसानों से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है। ऐसे में अखिलेश यादव का यह बयान आने वाले समय की चुनावी रणनीति का संकेत माना जा रहा है।
फिलहाल जातीय जनगणना और सामाजिक न्याय को लेकर अखिलेश यादव के बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। सरकार और विपक्ष दोनों अपने-अपने तर्कों के साथ जनता के बीच इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा रहे हैं।
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